बहेड़ी। पचपेड़ा गांव में एक किसान ने जमीन के मालिकाना हक से वंचित करने और एक यूनिवर्सिटी के कुलपति पर धोखाधड़ी से जमीन का बैनामा कराने का आरोप लगाया है। किसान के मुताबिक, चकबंदी अधिकारी के आदेश पर उसका नाम खतौनी से हटा दिया गया। मुकदमा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद धमकियां मिलने से किसान ने राज्यपाल, डीएम आदि से शिकायत की है।
किसान भगवान सिंह नामधारी ने बताया कि उन्होंने गाटा संख्या 519 की जमीन 1995 में गुरनाम सिंह से खरीदी थी। तब से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं। 20 साल बाद तीन फरवरी 2015 को चकबंदी अधिकारी का आदेश आया। इस आदेश से भगवान सिंह का नाम जमीन की खतौनी से निरस्त कर दिया गया। आरोप है कि तहसील प्रशासन ने बिना किसी सूचना के यह कार्रवाई की। यह तब हुआ जब चकबंदी 1965 में ही समाप्त हो चुकी थी। जानकारी मिलने पर भगवान सिंह ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में वाद दायर किया। यह मामला वहां विचाराधीन है, सुनवाई चल रही है।
धोखाधड़ी से दाखिल खारिज कराने का आरोपकिसान ने बताया कि मुकदमे के दौरान 24 जनवरी 2025 को एक यूनिवर्सिटी के कुलपति ने अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने इस विवादित जमीन का बैनामा अपनी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम करा दिया। आरोप है कि धोखाधड़ी से इसका दाखिल खारिज भी करवा लिया गया। भगवान सिंह ने इस बैनामे के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। दाखिल खारिज को लेकर उन्होंने यूपी जिलाधिकारी न्यायालय में भी अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलपति और उनके रिश्तेदार अब उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप है कि तत्कालीन नायब तहसीलदार शोभित चौधरी ने अपने न्यायालय में बुलाकर किसान को धमकाया था और सुविधा शुल्क की मांग की थी। रोजाना मिल रहीं धमकियों से किसान और उसका परिवार डरा हुआ हैं। किसान ने मामले की शिकायत राज्यपाल, उच्च शिक्षा निदेशक, डीएम और एसडीएम से की गई है। प्रशासन का हस्तक्षेप न होने से पचपेड़ा में खूनी संघर्ष की आशंका है।