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बेटी को करता था फोन- पैसा न दिलाया तो तेरे पिता को मार दूंगा

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सोमवार रात घर में घुसकर पिता से कहा- बेटियों को आगे करके कर्ज लेते हो फिर लौटाते नहीं

बरेली। सूदखोर ने ट्रांसपोर्टर पर दबाव बनाने के लिए हदें पार कर दी थीं। वह अक्सर उनकी बेटी को फोन कर पिता से पैसा दिलाने को कहता था, धमकी भी देता था अगर पैसा न दिलाया तो वह उसके पिता को घर से उठवाकर मरवा देगा। सोमवार रात नशे में धुत होकर वह जब ट्रांसपोर्टर के घर में घुसा, तब भी उसके साथी वकील ने उस पर यह कहकर ताना कसा कि उसका पिता बेटियों को आगे करके कर्ज लेता है और फिर लौटाता नहीं। सूदखोर की धमकियों से पहले से परेशान ट्रांसपोर्टर की बेटी इसी बात पर आहत होकर फंदे पर लटक गई।
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पीड़ित ट्रांसपोर्टर के मुताबिक बमनपुरी में रहने वाला सूदखोर पहले से उनका परिचित था और उसके साथ उनके मित्रतापूर्ण संबंध थे। उसका उनके घर में तक आना-जाना था। कारोबार में घाटे और बीमारी से घिरने के बाद उन्होंने उससे अपनी अंगूठी बिकवाने की बात कही थी जिस पर मित्रता का हवाला देते हुए उसने खुद कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद सूदखोर से उन्होंने एक लाख रुपये कर्ज लिया, उसने इसकी ब्याज दर तीन प्रतिशत बताई थी लेकिन फिर मनमानी शुरू कर दी।
अनर्गल ब्याज पर उन्होंने आपत्ति जताई तो सूदखोर उन्हें धमकाने लगा। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है। बड़ी बेटी बीकॉम ऑनर्स द्वितीय वर्ष और छोटी 12वीं में पढ़ती है। सबसे छोटा बेटा कक्षा नौ में पढ़ता है। ब्याज पर आपत्ति करने पर सूदखोर उनकी बड़ी बेटी को भी अक्सर फोन करके धमकी देने के साथ पैसा दिलाने के लिए दबाव बनाने लगा। कहता था, राजेंद्रनगर में उसके बहुत गुर्गे रहते हैं, अगर पैसे नहीं दिए तो उसके पिता को घर से उठवाकर हत्या करा देगा। इससे वह काफी परेशान रहती थी। सोमवार रात जब सूदखोर ने घर में घुसकर अपमानित किया तो वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सकी और आत्मघाती कदम उठा लिया।

लॉकडाउन में चौपट हुआ कारोबार फिर बीमारी ने और तोड़ दी कमर

ट्रांसपोर्टर का कहना है कि लॉकडाउन में उनका कारोबार चौपट हो गया और इसी दौरान वह बीमार भी हो गए। उनके ट्रकों की दो किस्तें भी टूट गईं तो परिवार चलाना मुश्किल हो गया। हर महीने दोनों ट्रकों की 45-45 हजार रुपये की किस्त जाती है। लॉकडाउन में कारोबार न होने से वह किस्तें भर नहीं पा रहे थे। इसके साथ पिछले साल अक्तूबर में उन्हें लिवर की भी बीमारी हो गई लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाए। इसी वजह से उन्हें कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

लगातार घटनाएं

  • 20 मार्च : प्रेमनगर के मोहल्ला भूड़ में रहने वाले डिग्री कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरुण कुमार को सूदखोरों ने बच्चों के सामने अपमानित किया तो उन्होंने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी।
  • 07 जून: फरीदपुर के मूल निवासी दवा करोबारी अखिलेश गुप्ता ने शाहजहांपुर में सूदखोर से त्रस्त होकर अपनी पत्नी रेशू और बेटे शिवांग व बेटी अर्चिता के साथ खुदकुशी कर ली।
  • 12 जून : सुभाषनगर निवासी कन्फेक्शनरी सेल्समैन संजीव ने सूदखोर और वितरकों के बकाए से त्रस्त होकर खुदकुशी कर ली।
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