बरेली। आला हजरत खानदान के बुजुर्ग नबीरे उस्तादे जमन हजरत मुफ्ती तहसीन रजा खां का 15वां उर्स तहजीब-ओ-अकीदत के साथ मुकम्मल हो गया। रविवार को कुल शरीफ की रस्म में बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत करते हुए अकीदत का नजराना पेश किया।
उर्स के आखिरी रोज मसलक-ए-आला हजरत कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें खानकाह के सज्जादानशीन मौलाना हस्सान रजा खां नूरी ने सदरुल उलमा की सादगी बयान करते हुए कहा कि मसलक-ए-आला हजरत का काम मोहब्बत के साथ आगे बढ़ना है। हुजूर मुफ्ती आजम ने सदरुल उलमा तहसीन मियां को गुल-ए-सरसबद करार दिया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उलमा की जिम्मेदारी है कि समझा बुझाकर लोगों को हिदायत के रास्ते पर लाया जाए। आखिर में दुआ के साथ अपनी तकरीर मुकम्मल की।
इससे पहले कारी नाजिर रजा तहसीनी ने कलाम पाक की तिलावत से कांफ्रेंस की शुरुआत की। महताब सिब्तैनी, सय्यद आबिद अली, आजम तहसीनी, नईम तहसीनी और इश्तेयाक तहसीनी ने नातो मनकबत का नजराना पेश किया। जामिया नूरिया रजविया के मुदर्रिस डॉ. मोहम्मद शकील मिस्बाही और मौलाना मुख्तार अहमद कादरी बहेड़वी की तकरीरें हुईं। उन्होंने आला हजरत और सदरुल उलमा की जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही शरीयत पर कायम रहने की अपील की। इसके बाद साहिबजादे अमान रजा खां तहसीनी ने हजरत सय्यद नजमी मियां का कलाम पेश किया। आखिर में दोपहर 12:30 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
इस मौके जानशीने तहसीने मिल्लत सूफी रिजावान रजा, खानकाह के मोहतमिम सुहेब रजा खां, साहिबजादे सफवान रजा खां, मौलाना उमर रजा खां, मौलाना हबीब रजा खां, नजीब रजा खां, मुअज्जम रजा खां, मौलाना हसन रजा खां, मुबश्शिर रजा खां सहित खानदान के तमाम लोग मौजूद रहे।