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उर्स-ए-रजवी: बरेलवी उलमा बोले- अमेरिका-ईरान की जंग सियासी है; बेटियों की तालीम और तरबियत पर जोर

Sat, 08 Aug 2026 10:40 AM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

उर्स-ए-रजवी के दौरान मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को सियासी बताया। उन्होंने इसे मजहबी जंग मानने से इन्कार किया। मुफ्ती बरेलवी ने मुसलमानों से उच्च शिक्षा हासिल करने का आह्वान किया। 
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मदरसा जामियातुर्रज़ा को आकर्षक रोशनी से सजाया गया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान की जंग सियासी है। इसे मजहबी जंग नहीं कहा जा सकता। अगर ईरान को मजहब-ए-इस्लाम की इतनी ही फिक्र होती तो पहले मस्जिद-ए-अक्सा, फलस्तीन और अफगानिस्तान के लिए लड़ता। ये बातें बरेली में उर्स-ए-रजवी के दूसरे दिन शुक्रवार को इस्लामिया मैदान पर आयोजित तहफ्फुज मजहब ओ मसलक कॉन्फ्रेंस को खिताब करते हुए मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहीं।
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उर्स ए रजवी में जायरीन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि मुल्क और खुद की मजबूती के लिए हमें उच्च शिक्षा हासिल करनी होगी। मुसलमानों को अपने क्षेत्र में अच्छे स्कूलों की स्थापना करनी होगी। हमारे मदरसों को आंतकवाद का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा है। देश के राष्ट्रपति रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एपीजे अब्दुल कलाम आदि ने भी मदरसों से ही शिक्षा हासिल की थी। मुसलमान ऐसे धरना-प्रदर्शन से दूर रहें, जिसका कोई अगुवा न हो। हमारे कई नौजवान बेगुनाह होने के बावजूद वर्षों से जेलों में बंद है। 
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उर्स में उमड़े जायरीन - फोटो : अमर उजाला
स्मार्टफोन नहीं, बेटियों के हाथ में दें कानून-ए-शरीयत जैसी किताबें
कारी यूसुफ रजा संभली ने कहा कि मुसलमान शरई दायरे में रहकर अपनी बेटियों को अच्छी तालीम और तरबियत दें। उनके हाथों में मोबाइल फोन की जगह कानून-ए-शरीयत जैसी किताबें दें, ताकि वे समझ सकें कि भलाई किसमें है? यह कॉन्फ्रेंस दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सैयद आसिफ मियां की देखरेख में हुई।
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