उर्स ए रजवी में जायरीन
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उन्होंने कहा कि मुल्क और खुद की मजबूती के लिए हमें उच्च शिक्षा हासिल करनी होगी। मुसलमानों को अपने क्षेत्र में अच्छे स्कूलों की स्थापना करनी होगी। हमारे मदरसों को आंतकवाद का अड्डा कहकर बदनाम किया जा रहा है। देश के राष्ट्रपति रहे डॉ. राजेंद्र प्रसाद, एपीजे अब्दुल कलाम आदि ने भी मदरसों से ही शिक्षा हासिल की थी। मुसलमान ऐसे धरना-प्रदर्शन से दूर रहें, जिसका कोई अगुवा न हो। हमारे कई नौजवान बेगुनाह होने के बावजूद वर्षों से जेलों में बंद है।
स्मार्टफोन नहीं, बेटियों के हाथ में दें कानून-ए-शरीयत जैसी किताबें
कारी यूसुफ रजा संभली ने कहा कि मुसलमान शरई दायरे में रहकर अपनी बेटियों को अच्छी तालीम और तरबियत दें। उनके हाथों में मोबाइल फोन की जगह कानून-ए-शरीयत जैसी किताबें दें, ताकि वे समझ सकें कि भलाई किसमें है? यह कॉन्फ्रेंस दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की सदारत व सैयद आसिफ मियां की देखरेख में हुई।