इसके बाद रात में ही दर्जनों महिलाएं मंदिर पहुंच गईं। उन्होंने नल से भरकर कुएं में पानी डालना शुरू कर दिया। देर रात कर महिलाएं पानी भरती रहीं और कुएं में डालती रहीं। अफवाहों को मानने वाले लोगों का कहना है कि ऐसा करने से वो कोरोना वायरस से बच जाएंगे।
आपको बता दें कि जनता कर्फ्यू के दिन थाली और ताली बजाने का मतलब सांकेतिक रूप से केवल यह दर्शाना था कि कोरोना वायरस जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी डॉक्टर, नर्स और अस्पताल कर्मचारी जैसे लोग, जो लगातार डटे हुए हैं हम उनके साथ हैं। कोरोना वायरस का इन अफवाहों से कोई संबंध नहीं है।
ऐसे समय में सरकार के दिशानिर्देशों का पालन करें, ज्यादा से ज्यादा अपने घरों में रहें और किसी भी फिजूल की अफवाह से बचने की कोशिश करें।