फ्लाईओवर का विरोध कर रहे व्यापारियों की मांग पर कराया गया था अंडरपास के लिए सर्वे
बरेली। कुतुबखाना में फ्लाईओवर के बजाय अंडरपास बनाने की मांग पर अड़े व्यापारियों के लिए मायूस करने वाली खबर है। नोएडा के विशेषज्ञों की टीम ने कुतुबखाना में सर्वे करने के बाद साफ किया है कि यहां किसी भी हालत में अंडरपास बनाना संभव नहीं है और फ्लाईओवर एकमात्र विकल्प है। टीम ने अपनी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है जो एक-दो दिन में स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
अतिक्रमण और जाम से जूझ रहे कुतुबखाना में आवाजाही को सुगम बनाने के लिए फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव कुछ समय पहले स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में पारित किया गया था। सेतु निगम के इंजीनियरों के सर्वे करने के बाद 1577 मीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण के लिए 136 करोड़ का बजट भी मंजूर किया जा चुका है लेकिन इलाके के व्यापारी यहां फ्लाईओवर बनाने का जोरदार विरोध कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि कुतुबखाना में अगर फ्लाईओवर बना तो उनका व्यापार तबाह हो जाएगा। फ्लाईओवर का प्रस्ताव मंजूर होने के बाद व्यापारियों ने जाम की समस्या हल करने के लिए सड़कों पर अपना अतिक्रमण हटाने की पेशकश की थी लेकिन इस मुद्दे पर अपने ही बीच दो फाड़ होने के बाद कुतुबखाना में फ्लाईओवर के बजाय अंडरपास का निर्माण करने की मांग शुरू कर दी।
व्यापारियों के विरोध की वजह से सेतु निगम को कुतुबखाना में अंडरपास बनाने के विकल्प पर विचार करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद हाल ही में नोएडा से आई विशेषज्ञों की एक टीम ने कुतुबखाना में सर्वे किया था। इस टीम ने अंडरपास के निर्माण की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। टीम के सदस्यों ने कई अहम तकनीकी कारणों का उल्लेख करते हुए कहा है कि कुतुबखाना में डेढ़ किलोमीटर लंबा अंडरपास बनाने की जरूरत है जो किसी हालत में संभव नहीं है।
कुतुबखाना में अंडरपास बनाने की संभावना पर मंथन चल रहा है। नोएडा के विशेषज्ञों ने भी रिपोर्ट तैयार की है। हालांकि अभी रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट के अध्ययन के बाद स्थिति साफ की जा सकेगी। - देवेंद्र सिंह, मुख्य परियोजना अधिकारी सेतु निगम
तकनीकी नजरिया
अंडरपास बनाने में तीन प्रमुख बाधाएं
सिर्फ 20 फुट गहराई में ही पानी कैसे करेंगे 30 फुट गहरी खोदाई
कुतुबखाना अंडरपास के लिए सर्वे करने वाली नोएडा की टीम में शामिल विशेषज्ञों के मुताबिक कुतुबखाना में अंडरपास के निर्माण के लिए कम से कम 30 फुट गहरी खोदाई करनी पड़ेगी जबकि यहां 20 से 25 फुट गहराई पर ही पानी है जो बरसात के दौरान और भी ऊपर आ जाता है। लिहाजा यहां 30 फुट गहरी खोदाई करना संभव नहीं है।
डेढ़ किमी लंबे अंडरपास के लिए पांच सौ मीटर पहले से करनी होगी खोदाई
विशेषज्ञों के मुताबिक कोहाड़ापीर से जिला अस्पताल रोड तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे अंडरपास के लिए दोनों तरफ पांच सौ मीटर पहले से खोदाई करनी होगी। वहीं प्रवेश द्वार बनाना होगा। लिहाजा कोहाड़ापीर से अंडरपास बनाने का मतलब है कि जीआरएम स्कूल के पास खोदाई शुरू की जाए जो संभव नहीं है। इसी तरह जिला अस्पताल की तरफ प्रवेश के लिए पटेल चौक से पहले ही प्रवेश देना होगा जिस पर विचार भी नहीं किया जा सकता।
खोदाई होते ही ढह जाएंगी सड़क के दोनों तरफ खड़ी जर्जर इमारतें
अंडरपास बनाने में सबसे बड़ी बाधा बाजार में सड़क के दोनों तरफ खड़ी पुरानी और जर्जर इमारतों को बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि खोदाई के दौरान कंपन होने से इन इमारतों के धराशायी होने की आशंका है। अंडरपास के लिए खोदाई शुरू करने के बाद इन इमारतों के गिरने से जन-धन की हानि होनी भी तय है। इस पर प्रशासन जोखिम नहीं ले सकता है। कई जगह पर सड़क की चौड़ाई भी बहुत कम है।