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किफायती दिवाली के लिए आजमाएं अपना हुनर

Thu, 12 Oct 2017 01:51 AM IST
बरेली
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नवरात्र और दशहरे के बाद अब दिवाली की तैयारियां शुरू हो गई हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि किस तरह कम बजट में दिवाली मनाएं तो इसका समाधान आपके हुनर और थोड़ी सी समझदारी में छिपा है। महंगे दिवाली गिफ्ट, मिठाई, घर की सजावट, पूजा सामग्री खरीदने की जगह इन्हें घर पर ही बनाने की कोशिश करें। इसमें क्रिएटिविटी का इस्तेमाल कर दिवाली को किफायती बनाया जा सकता है। 
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बजट में सुंदर बनाए घर 
घर की सजावट के लिए बाजार में तमाम तरीके की झालरें, बंधनवार, स्टीकर मौजूद हैं। थोक में बंधनवार की कीमत 60 और 120 रुपये प्रति पीस है, जबकि फेरी और रिटेल दुकानों में यही तीन से पचास रुपये के मार्जिन पर बिक रहे हैं। थोक बाजार में लक्ष्मी-गणेश और शुभ दीपावली के स्टीकर का दस पीस का पैकेट सौ रुपये का है, जबकि रिटेल में एक पीस 15 से बीस रुपये का बिक रहा है। आपके पास समय है तो बाजार से कच्ची सामग्री लेकर सजावटी चीजें बना सकते हैं। दस रुपये पैकेट के हिसाब से घंटियां, मोती, प्लास्टिक के बैंड आदि खरीदकर यह काम किया जा सकता है। खर्च 30 से 40 रुपये के बीच आएगा। इन दिनों बाजार में रंगोली के लिए गीले रंग की कोन 35 रुपये की मिल रही है। आप चाहें तो बुरादे में सूखे रंग मिलाकर भी रंगोली बना सकते हैं। 
डिब्बा बाजार का, मिठाई घर की 
दिवाली पर रिश्तेदार और पड़ोसियों के घर मिठाई और गिफ्ट भेजने का चलन बढ़ा है। मिठाई के खर्च को आधा करने के लिए घर में ही मिठाई बनाएं। खोवा या बेसन की मिठाई घर में ही बनाकर प्रति किलो दो सौ रुपये की बचत कर सकते हैं। घर की बनी मिठाई को खूबसूरती से पैक करने के लिए लिए बाजार में बिक रहे मिठाई के डिब्बे खरीदिए। दुकानदार अंकित खंडेलवाल ने इन डिब्बों की कीमत तीन से आठ रुपया प्रति पीस बताई। यही काम ड्राई फ्रूट का डिब्बा बनाने के लिए भी करें। शहामतगंज या अन्य थोक बाजारों से किलो के हिसाब से मेवा खरीदकर घर में भूनें और सिल्वर पेपर की सहायता से डिब्बे में सजाकर गिफ्ट करें। 
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सामग्री                                बाजार भाव (प्रति किलो)     घर में बनाने पर कुल लागत   
नुक्ती और बेसन के लड्डू     340                              80 से सौ 
खोये की मिठाई                     400                               200 
ड्राई फ्रूट का डिब्बा               885                          715
                          (काजू, पिस्ता, बादाम, किशमिश : हर सामग्री ढाई सौ ग्राम )
घर लाकर चखिए स्वाद 
त्योहार पर स्टोरेंट से तैयार सब्जी खरीदकर घर में रोटी या पूड़ी बनाकर सर्व कर सकते हैं। कई रेस्टोरेंट प्रति थाली की जगह ढाई सौ ग्राम, आधा किलो के हिसाब से पनीर, छोले, मशरुम आदि की सब्जियां बेचते हैं। ऑन कॉल डिलीवरी भी उपलब्ध है। रेस्टोरेंट में बैठकर खाने में आठ सौ से एक हजार रुपये का न्यूनतम खर्च आता है, जबकि एक किलो तैयार सब्जी का मूल्य चार सौ रुपये है। इस तरह आप कम से कम चार सौ रुपये बचाएंगे। 
घर में मेंहदी लगवाकर बचाएं रुपये 
बाजार में एक हथेली पर बेल रखने के सौ रुपये, हथेली और हाथ के ऊपरी हिस्से में घनी डिजायन की मेंहदी लगाने के तीन सौ रुपये हैं। जबकि अगर आप कोहनी तक मेहंदी लगवाना चाहती हैं तो छह सौ रुपये खर्च करने होंगे। वहीं, घर पर ही सदस्यों या आसपास की सहेलियों से मेहंदी लगवाएंगी तो दस रुपये प्रति कोन के हिसाब से ही खर्च होगा। 
कहीं झूठा तो नहीं ‘दिवाली ऑफर’ 
त्योहारों पर खरीदारी बजट से बाहर इसलिए भी हो जाती है क्योंकि इन दिनों विशेष ऑफर के कारण लोग कई ऐसे सामान भी खरीद लेते हैं, जिनकी तुरंत आवश्यकता नहीं होती। शहर के एक घड़ी व्यापारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि घड़ी के ज्यादातर बड़े ब्रांड त्योहारों पर ऑफर नहीं देते। ऑफर श्राद्ध या उन दिनों में ही आते हैं जब बिक्री कम होती है। ऐसे में सामान्य कटौती को विशेष ऑफर मानने की भूल न करें। कपड़ों के कई ब्रांड में रेग्युलर फ्लैट मिलता है पर स्टोर मालिक इसे विशेष ऑफर बताकर बेचते हैं। इससे भी सतर्क रहें।

थोक बाजारों में अब आम ग्राहक भी बड़ी संख्या में खरीदारी करने आने लगे हैं। महिलाएं ग्रुप में आकर भी शॉपिंग करती हैं। 
- शोभित बावा, मूर्ति विक्रेता, बड़ा बाजार 

जीएसटी के कारण डेकोरेशन का सामान महंगा हो गया है। इस कारण बिक्री बहुत कम है। लोग कच्चा सामान ले जाकर घर में बनाने लगे हैं। कई लोग घर में बनाकर ऑनलाइन बिक्री भी कर रहे हैं। - शिवम्, डेकोरेशन सामग्री विक्रेता, गली नवाबान 

दिवाली पर रिश्तेदारों के घर मिठाई का डिब्बा भेजने का चलन है। मिठाई का खर्च कम करने के लिए घर में गुजिया बनाती हूं।   
 - प्रीति खंडेलवाल, गांधी नगर
 
फूल और रंगोली से ही घर की सजावट करेंगे। बाजार से नाश्ता और मिठाई खरीदने के बजाय घर में ही बिस्कुट, केक और लड्डू बनाऊंगी, कोशिश रहती है कि दिवाली का खर्च बजट से बाहर न जाए। - शमा, आलमगिरीगंज
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