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डेलापीर मंडी में मुंबई-दिल्ली से आने वाले ट्रकों की अब भी निगरानी नहीं

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डेलापीर मंडी में फलों की छंटाई करते लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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मंडी का स्टाफ खतरे से बेपरवाह, होमगार्ड की कोई सुनता नहीं

बरेली। डेलापीर मंडी में कोरोना से जूझ रहे महाराष्ट्र से पपीता और अंगूर की आवक जारी है। इस व्यावसायिक गतिविधि पर निगरानी की व्यवस्था भी कमजोर है। इस मामले में पुलिस, नगर निगम, मंडी स्टाफ से लेकर आढ़ती तक बेपरवाह बने हैं।
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मंडी स्थल के गेट पर ड्यूटी को बैठे दो होमगार्ड पूछताछ की औपचारिकता निभाते हैं। हालांकि अमर उजाला में खबर छपने के बाद मंडी में बाहर से आने वाले ज्यादातर लोगों के भीतर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। औपचारिक पूछताछ भी होती है पर पुलिस से लेकर मंडी अधिकारियों ने स्क्रीनिंग की कोई व्यवस्था अब तक नहीं की है। शुक्रवार को यहां ड्राइवर ग्वालियर निवासी घनश्याम महाराष्ट्र के सादा से अपना ट्रक लेकर आए थे। इसमें पपीता भरा था। बताया कि रास्ते में या मंडी में किसी तरह की चेकिंग नहीं की गई। चार दिन पहले महाराष्ट्र से चले थे, सुबह ही बरेली आए हैं। आढ़त पर कई पल्लेदार पपीता का उतार और पैकिंग करा रहे थे।
मंडी गेट पर वाहनों की एंट्री करने वाले मंडी सहायक राम रतन यादव का कहना था कि हमारे पास इन वाहन चालकों से पूछताछ या कोई अन्य सुरक्षा मानक अपनाने का कोई आदेश नहीं है। हम केवल एंट्री करते हैं जिसका डाटा अफसरों को भेज दिया जाता है।
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वहीं, आढ़ती सुरक्षा बंदोबस्त की बात पर अपने घाटे का दुखड़ा सुनाते हैं। मैसर्स बुंदन खां फर्म के मालिक मुस्ताक खां का कहना था कि मंडी में ग्राहकों की आमद बहुत कम और माल की आवक ज्यादा है। ऐसे में अधिकांश फल व सब्जी या तो कम दाम पर देनी पड़ती है या खराब हो जाती है। सुरक्षा बंदोबस्त की बात पर बोले कि यहां इतनी फुर्सत किसे है। माल आता है और वाहन चला जाता है। बस भीड़ से बचते हैं।
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