बरेली। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अभियान तो कई बार चलाए गए मगर सड़कों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं के आतंक से अब तक मुक्ति नहीं मिल सकी है। शहर के पॉश इलाकों की सड़कों और पार्कों में भी छुट्टा पशुओं का कब्जा है। इस वजह से आए दिन हादसे होते हैं, कई की जान भी जा चुकी है। सड़क हादसे रोकने के लिए पहली नवंबर से यातायात माह बनाया जा रहा है पर छुट्टा पशुओं पर लगाम नहीं है।
स्थिति यह है कि आवास विकास जैसी पॉश कालोनी के पार्क में आए दिन पशु घुस जाते हैं। यही हाल गोविंद बल्लभ पंत पार्क का है। राजेंद्रनगर और साहूकारा मोहल्ले में सड़कों पर घूमने वाले छुट्टा पशु लोगों पर हमला कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब नगर निगम ने छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए टीम लगा रखी है।
नगर निगम बोर्ड की बैठकों में भी यह मुद्दा उठता रहा है। हर बार अधिकारी आश्वासन की घुट्टी दे देते हैं मगर धरातल पर काम नहीं होता।
नगर निगम के सामने भी नहीं पकड़े गए छुट्टा पशु
पटेल चौक से सेटेलाइट की ओर जाने वाले मार्ग पर कालीबाड़ी मंदिर और एलन क्लब सब्जी मंडी के सामने छुट्टा पशु घूमते दिखे। सब्जी मंडी के सामने ही नगर निगम का कार्यालय है। यहां से गुजरने वाले अधिकारियों की नजर रोज ही इन छुट्टा पशुओं पर पड़ती है मगर, इन्हें पकड़वाने के लिए प्रयास नहीं किए जाते।
बचकर चलने में भलाई
चौकी चौराहा से गांधी उद्यान के बीच कई स्थानों पर छुट्टा पशुओं की वजह से यातायात प्रभावित होता है। प्रभा टाॅकीज के सामने शनिवार को दोपहर डेढ़ बजे जानवर घूमते दिखे। यहां से गुजरने वाले लोग बचकर निकल रहे थे।
हमलों में चार की गई जान
25 जनवरी को संजय नगर के करीब स्थित सेंट्रल स्टेट कॉलोनी निवासी सेवानिवृत्त गन्ना प्रबंधक कृष्णानंद पांडेय पर छुट्टा पशु ने हमला कर दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
15 फरवरी को आंवला क्षेत्र के रामनगर रोड पर पेट्रोल पंप के नजदीक अचानक सड़क पर आए सांड़ से एक बाइक टकरा गई। हादसे में बाइक सवार मनौना निवासी सतेंद्र मौर्य (26) की जान चली गई।
15 फरवरी को फतेहगंज पश्चिमी को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने वाली सड़क पर गैस गोदाम के पास औंध गांव निवासी राकेश कुमार (45) की सांड़ के हमले में जान चली गई
12 नवंबर को धनेटा-शीशगढ़ मार्ग पर अचानक बाइक के सामने सांड़ आने से परतापुर गांव के पास बाइक असंतुलित हो गई। घायल नाजहां पत्नी छोटन की उपचार के दौरान 14 नवंबर को दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई।
पार्षदों ने अभियान पर उठाए सवाल
पार्षद राजेश अग्रवाल ने नगर निगम के अभियान पर सवाल उठाए। बोले-दूध डेयरी वाले दूध निकालने के बाद पशुओं को छोड़ देते हैं। नगर निगम की टीम निकलने से पहले ऐसे डेयरी वालों को फोन कर देती है और वे अभियान के दिन पशु हटा लेते हैं। पार्षद शशि सक्सेना ने कहा कि आईवीआरआई से केके हास्पिटल मार्ग पर पशुओं के झुंड खासकर रात के वक्त रहते हैं। यह नगर निगम के अधिकारियों को क्यों नहीं दिखते?
लोगों की बात
11 नवंबर की शाम दूध लेने जाते समय अचानक छुट्टा पशु ने हमला कर दिया। चोट लगना की वजह से कई दिन तक चलना दुश्वार रहा। - अंजना साहनी, राजेंद्रनगर
मैं अपने घर के बाहर बैठी थी। अचानक छुट्टा जानवर ने सींग मार दिया। कई और लोगों को भी छुट्टा पशु घायल कर चुके हैं। - शकुंतला शर्मा, राजेंद्र नगर
छुट्टा पशु पकड़ने के लिए अभियान चलाए गए हैं। तमाम पशु पकड़े भी गए। जो सड़क पर घूम रहे हैं, उन्हें भी पकड़वाया जाएगा। अगर कहीं छुट्टा पशु दिखते हैं तो नगर निगम के टोल फ्री नंबर पर कॉल कर सकते हैं। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
अमर उजाला ब्यूरो