बरेली। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विस प्रारंभिक परीक्षा रविवार को 40 केंद्रों पर हुई। पहली ही पाली में करीब 50 फीसदी अभ्यर्थी नहीं आए। कठिन सवालों की वजह से दूसरी पाली में यह संख्या बढ़कर 55 फीसदी हो गई। करीब दो तिहाई सवालों के उत्तर लिखने में अभ्यर्थियों के पसीने छूट गए।
विशेषज्ञओं के मुताबिक इस बार पेपर बेहद कठिन था। यह पेपर उन्हीं अभ्यर्थियों के लिए था जिन्होंने गंभीरता से अध्ययन कर तैयारी की थी। सौ अंक के जीएस के पेपर से ही मेरिट बनती है लिहाजा इसमें सवालों का चयन बेहद बारीकी से किया गया था। अनुमान के अनुसार इस प्रश्नपत्र में आए करीब एक तिहाई ही सवाल सामान्य थे। पर्यावरण से 19, भूगोल से 16, इतिहास से 15, करंट अफेयर से 17, साइंस टेकभनोलॉजी के 24, भारतीय राज व्यवस्था से दस, भारतीय अर्थव्यवस्था से नौ प्रश्न थे। प्रश्नों के पैटर्न भी नए थे। इस बार एक जोड़ा, दो जोड़ा, मिलान को लेकर भी सवाल पूछे गए थे।
इसके अलावा कोरोना महामारी, सोमनाथ मंदिर, ओपन सोर्स प्लेटफार्म जैसे मुद्दों से संबंधित सवाल भी थे। इतिहास और विज्ञान के सवाल ऐसे थे, जिन्हें आसान नहीं कहा जा सकता है। तैयारी की कमी वजह रही होगी कि परीक्षा की पहली पाली में ही 50 फीसदी अभ्यर्थी नहीं पहुंचे। पहली पाली में कठिन सवालों से जूझने के बाद दूसरी पाली में पांच फीसदी और अभ्यर्थी कम हो गए।
अफसरों ने किया परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण
परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए तैनात सेक्टर, स्टेटिक मजिस्ट्रेट के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी केंद्रों का निरीक्षण करते रहे। एफआर इस्लामिया कॉलेज के ब्लॉक ए, ब्लॉक बी में करीब 50 फीसदी अभ्यर्थी पहुंचे। प्रधानाचार्य मेजर जावेद खालिद ने दूरदराज केंद्र होने से कम तादाद होने की बात कही। फरहान अहमद ने बताया कि दिव्यांग अभ्यर्थियों के इस्लामिया कॉलेज के ब्लॉक बी को केंद्र बनाया गया था। इनमें पंजीकृत 60 अभ्यर्थियों में से 30 ही पहुंचे। अपर आयुक्त प्रशासन अरुण कुमार ने बताया कि 11771 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इसमें से 45 फीसदी ही शामिल हुए।
जैमर लगे होने से आसपास नेटवर्क की दिक्कत
परीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन बनाने के लिए परीक्षा केंद्रों पर जैमर भी लगाए गए थे। इस वजह से जब परीक्षा शुरू हुई तो कई परीक्षा केंद्रों के आसपास के इलाकों में नेटवर्क की समस्या पैदा हो गई। पहली और दूसरी पाली के बीच ब्रेक के दौरान जैमर बंद कर दिए जाने से लोगों को जरूर कुछ राहत मिली। जैमर लगने की जानकारी न होने से कई लोगों ने नेटवर्क प्रदाता कंपनियों की सेवाओं पर भी सवाल उठाए। केंद्रों के पास से गुजरने वाले राहगीर जो फोन पर बात कर रहे थे, अचानक संपर्क टूटने से वह परेशान हुए। कुछ लोग छतों पर जाकर नेटवर्क तलाशते रहे।