बदहाल औद्योेगिक क्षेत्र- एक : परसाखेड़ा
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यूपीएसआईडीसी (उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम) के परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया को नगर निगम ने टेकओवर तो कर लिया लेकिन इसका अपेक्षित विकास आज तक नहीं किया जबकि टैक्स वसूली जारी है। इस क्षेत्र में करीब आधे उद्योग तो सिर्फ कागजों पर संचालित हो रहे हैं। 43 इकाइयों को नोटिस भी दिया गया था कि अगर उद्योग नहीं चलाया तो प्लाट रद कर दिया जाएगा पर हुआ कुछ नहीं।
जिले में करीब 40 वर्ष पहले परसाखेड़ा पहला इंडस्ट्रियल एरिया चिह्नित किया गया। यूपीएसआईडीसी ने 367 एकड़ भूमि पर एरिया विकसित किया और वर्ष 2004 में नगर निगम को सौंप दिया। यहां कागजों पर 359 प्लाट आवंटित हैं, जबकि आईआईए ने अपनी सर्वे रिपोर्ट में करीब 190 इकाइयां संचालित पायी हैं। करीब पौने दो सौ प्लाट खाली हैं या फिर वहां उद्योग नहीं चल रहे हैं।
उद्योग बंधु की बैठक में सिर्फ वादे
जिला और मंडलीय उद्योग बंधु बैठकें नियमित होती हैं। बैठक में सड़क, नाला, नाली निर्माण और सफाई, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था, अतिक्रमण आदि मुद्दे उठते हैं। कई बार इकाइयां नहीं चलाने वालों के प्लाट रद कर नए सिरे आवंटित करने की मांग भी उठी। डीएम और कमिश्नर इन सभी मुद्दों पर निर्देश देते रहे हैं, लेकिन अभी तक नगर निगम और यूपीएसआईडीसी पर इसका कोई असर नहीं दिखा है।
सीएफसी पर फायर बिग्रेड काबिज
यूपीएसआईडीसी मानचित्र में सामान्य सुविधा केंद्र (सीएफसी) निर्माण के लिए करीब 12 हजार मीटर भूमि आरक्षित है। लेकिन मौके पर अग्निशमन दल काबिज है, उसके लिए अन्य स्थान पर दो हजार मीटर भूमि दी गयी थी, लेकिन पिछले सात वर्षों से विभाग ने बिल्डिंग ही नहीं बनायी।
सड़क और पार्कों पर कब्जे
दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर यूपीएसआईडीसी ने पार्क चिह्नित किए हैं, लेकिन मौके पर सपाट है और कई स्थानों पर अतिक्रमण है। एक मार्ग पर अस्सी फुट चौड़ी सड़क पर दोनों ओर इतने कब्जे हो गए हैं कि यह सड़क अब गली हो गयी है।
हर तरफ बदहाली
नाला हो या नाली सभी कूड़े से पटी हैं। प्लाट नंबर डी एक से डी दस तक जल निकास ही बंद है। जन सुविधाएं जीरो हैं। दस हजार से ज्यादा मजदूर इस इंडस्ट्रियल एरिया में कार्यरत हैं, उनके लिए भी कोई सुविधा नहीं है। बाहर से आने वाले चालकों के रेस्ट रूम और रेस्त्रां आदि तक नहीं बने हैं।
43 इकाइयों को नोटिस
करीब पौने दो सौ लोगों ने प्लाट तो आवंटन करा लिए हैं, लेकिन काम नहीं कर रहे हैं। ऊंचे दामों पर एक मिलीभगत से खरीद फरोख्त होती रहती है। यूपीएसआईडीसी ने इकाईयां नहीं चलाने वाले 43 उद्यमियों को नोटिस जारी कर कहा है कि 60 दिन में कार्य शुरू नहीं होने पर प्लाट रद होंगे। नौ प्लाट के मामले में कोर्ट में चल रहे हैं।
इनका कहना है:
निगम अतिक्रमण हटाए
यूपीएसआईडीसी ने तो परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया 13 वर्ष पहले ही नगर निगम को सौंप दिया। करीब 27 वर्ष तक हमने रखरखाव किया। सड़क, पार्क, नाला, नाली पर अतिक्रमण और सफाई आदि कार्य निगम की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद हम स्ट्रीट लाइट बिल देते हैं। इकाइयां नहीं चलाने वालों को नोटिस दिए गए हैं। एक भी प्लाट खाली नहीं है।
- सुरेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, यूपीएसआईडीसी
ऐसे तो नहीं होगा विकास
सरकारी तंत्र औद्योगिक माहौल बनाने में रुचि नहीं लेता। परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया शहरी क्षेत्र में आ गया है। हर वर्ष नगर निगम सवा करोड़ रुपये से ज्यादा टैक्स वसूलता है। उद्योग बंधु बैठक में समस्याएं उठती हैं लेकिन इनका निस्तारण नहीं होता। तब कैसे होगा औद्योगिक विकास? आईआईए ने इंडस्ट्रियल एरिया अपने बूते बनाए हैं, और अच्छे चल रहे हैं।
- दिनेश गोयल, मंडल अध्यक्ष, आईआईए
कौन दूर करेगा बदहाली
हर वर्ष सवा अरब रुपये विभिन्न मदों में टैक्स जमा होता है, फिर भी एरिया बदहाल है। करीब 40 वर्ष पुराना इंडस्ट्रियल एरिया अभी तक आइडिल नहीं बन पाया है। पानी निकासी, सफाई, जन सुविधाएं, कब्जे आदि पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यूपीएसआईडीसी ने हैंडओवर कर पल्ला झाड़ लिया और नगर निगम काम नहीं करता है, आखिर कैसे दूर होगी बदहाली?
- घनश्याम खंडेवाल, अध्यक्ष, चैंबर ऑफ कामर्स
समस्याएं हल कराएंगे
मैंने हाल ही मैं ही कार्य ग्रहण किया है। अमर उजाला से ही इंड्रस्ट्रियल एरिया परसाखेड़ा संबंधी समस्याएं मेरे सामने आई हैं। मैं जल्द ही इस मामले में संबंधित अधिकारियों से बात कर सभी बिंदुओं पर चर्चा कर हल निकालूंगा।
- आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त