बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या छह तबरेज अहमद ने हत्या के दोषी फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव कुइयां खेड़ा निवासी रामपाल, उसके पुत्र रामकेश और गांव के ही नन्हे को उम्रकैद व 35-35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हत्या के दो अन्य आरोपियों सगे भाई राजेंद्र व सूबेदार की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
गांव के बबलू ने 17 मार्च 2014 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि 16 मार्च को शाम छह बजे वह अपने तहेरे भाई अवनीश के साथ घर के दरवाजे पर बैठा था। इसी दौरान नन्हे, राजेंद्र, सूबेदार, रामपाल व रामकेश गालियां देते हुए आए। नन्हे के पास एकनाली लाइसेंसी बंदूक व अन्य के पास तमंचे थे। इन लोगों ने फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से बबलू, अवनीश और उसके ताऊ घायल हो गए। अवनीश को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन बाद उसकी मौत हो गई। विवेचना के बाद पुलिस ने पांचों आरोपियों के खिलाफ मई 2014 में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। हत्या का कारण बच्चों के विवाद को लेकर रंजिश रही।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से 13 गवाह और 25 साक्ष्य पेश किए गए। अवनीश की पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट और दो अन्य घायलों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के बयान भी दोष सिद्धि का आधार बने। कोर्ट ने रामपाल, रामकेश और नन्हे को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। संवाद
पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने व गैंगस्टर के तीन आरोपी दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। पुलिस टीम पर हमला करने और गैंगस्टर एक्ट के आरोपी भुता थाना क्षेत्र के गांव खरेली निवासी रिंकू उर्फ विमलेश, ककरा कलां के सुरेश कुमार और इवरा गांव के महेश को स्पेशल जज अमृता शुक्ला ने दोषमुक्त करार दिया है। स्वतंत्र गवाह न होने के कारण आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया।
भुता थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष सियाराम ने आठ जून 2007 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह हमराह एसआई याकूब खां, आरक्षी जितेंद्र और गौरव के साथ गश्त पर थे। इस दौरान बीसलपुर रोड पर गिरधरपुर जाने वाले तिराहे के पास कार की रोशनी में तीन संदिग्ध दिखे। पुलिस को देखकर वे भागने लगे। पीछा करने पर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने रिंकू को मौके से गिरफ्तार कर लिया। सुरेश और महेश भागने में कामयाब हो गए।
विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आठ मार्च 2008 को चार्जशीट दाखिल कर दी। बाद में सुरेश और महेश को भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई भी कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने चार गवाह पेश किए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
कोर्ट ने कहा- निष्पक्ष विवेचना अभियुक्त का मौलिक अधिकार
फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वादी, विवेचक व साक्षीगण सभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी हैं। विवेचक ने इस मामले में आसपास के व्यक्तियों के बयान अंकित करने का कोई प्रयास नहीं किया। इससे विवेचना को निष्पक्ष नहीं कहा जा सकता। निष्पक्ष विवेचना संविधान के अनुच्छेद 20 व 21 में प्रदत्त अभियुक्त का मौलिक अधिकार है। अगर निष्पक्ष विवेचना नहीं की जाती है तो यह संविधान की ओर से प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।
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छात्र हिमांशु एनकाउंटर मामले में अंतिम बहस आज
- शाहजहांपुर जिले के कटरा थाने के तत्कालीन प्रभारी सहित तीन सिपाही हैं आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। शाहजहांपुर के मोहल्ला दिलाजाक निवासी ऑर्डिनेंस फैक्टरी कर्मचारी अशोक गिहार के बेटे हाईस्कूल के छात्र रहे हिमांशु गिहार के एनकाउंटर मामले में अपर जिला जज कमलेश्वर पांडेय की कोर्ट में अंतिम बहस सोमवार को होगी। इस मामले में 11 नवंबर को ही अंतिम बहस होनी थी, लेकिन बचाव पक्ष के अधिवक्ता के स्थगन प्रार्थनापत्र पर कोर्ट ने 17 नवंबर की तारीख नियत की थी।
शाहजहांपुर जिले की कटरा थाना पुलिस ने फरीदपुर थाना क्षेत्र के गांव गुलाबनगर के पास एक फर्जी मुठभेड़ में छह जनवरी 2006 को हिमांशु की हत्या कर दी थी। घटना के समय हिमांशु अपने दो दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलकर लौट रहा था। प्रदेश के प्रमुख सचिव के आदेश पर 19 अगस्त को कटरा के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश कुमार सिंह, सिपाही सिपाही कमलेश, सुरेश व अंजनी पांडेय के खिलाफ शाहजहांपुर की सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
घटनास्थल फरीदपुर होने के कारण बाद में मुकदमा फरीदपुर थाने को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले की जांच सीबीसीआईडी से कराई गई। जांच में एनकाउंटर फर्जी पाया गया था। सीबीसीआईडी ने कटरा थाने के तत्कालीन प्रभारी दिनेश कुमार सिंह, सिपाही कमलेश, सुरेश व अंजनी पांडेय के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।