आंवला के एक तस्कर को देनी थी अफीम, 1.80 लाख रुपये भी मिले
आंवला। कोतवाली पुलिस ने झारखंड के तीन अफीम तस्करों को गिरफ्तार किया है। उनकी कार से साढ़े चार किलोग्राम अफीम और 1.80 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई है। तीनों आंवला में एक तस्कर को अफीम देने आए थे।
सीओ रामप्रकाश ने बताया कि आंवला-भमोरा रोड पर होली फैमिली कांवेंट स्कूल के पास झारखंड नंबर की कार रोकी तो उसमें बैठे लोग संदिग्ध दिखे। पूछताछ में एक ने अपना नाम अरुण कुमार, थाना गिधौर जिला चतरा, दूसरे ने कपिल कुमार और तीसरे ने विकास कुमार गांव नगंवा, थाना ईंटखोरी, जिला चतरा (झारखंड) बताया। तलाशी में अरुण के पास से ढाई किलो अफीम और 1.80 लाख रुपये, कपिल और विकास के पास से एक-एक किलो अफीम बरामद हुई। पूछताछ के दौरान तस्करों ने बताया कि 1.80 लाख रुपये वे बहेड़ी निवासी महेंद्र से लेकर आए हैं। उसे एक महीना पहले उत्तराखंड क्षेत्र में पुलभट्ठा के पास अफीम दी थी। तब उसने 1.80 लाख रुपये बाद में देने को कहा था। गुरुवार को अफीम की सप्लाई संजय नाम के व्यक्ति को आंवला में पेट्रोल पंप के पास देनी थी। कोतवाल सुनील कुमार ने बताया तस्कर संजय की तलाश की जा रही है।
पेट से अफीम के पैकेट और पैरों पर पट्टी से बांध रखे थे रुपये
तस्करों ने पुलिस से बचने के लिए अफीम को पॉलिथीन में पैक करके पेट से बांध रखा था। अरुण ने 1.80 लाख रुपये पैरों पर पट्टी से बांध रखे थे। पहले तो तीनों ने पुलिस को इधर-उधर की बातें करके गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने जब उनकी तलाशी ली तो अफीम और नकदी बरामद हो गई।
फतेहगंज पश्चिमी के बाद आंवला बना अफीम तस्करी का हब
फतेहगंज पश्चिमी के बाद अब आंवला सर्किल अफीम तस्करी का हब बन गया है। झारखंड के अफीम तस्कर यहां बड़े पैमाने पर अफीम की सप्लाई कर रहे हैं। यहां से दिल्ली, हरियाण, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के लिए अफीम भेजी जा रही है। तीन दिन पूर्व अलीगंज पुलिस ने दो तस्करों को पकड़कर इसका खुलासा किया था। तस्करों ने बताया था कि वे ढकिया के श्याम बिहारी को अफीम देते हैं। आगे अफीम की सप्लाई श्याम बिहारी ही करता है। हालांकि अलीगंज पुलिस उसे नहीं पकड़ सकी।
हेल्थ सप्लीमेंट मिलाकर बढ़ाते हैं वजन
तस्कर अरुण और कपिल ने बताया कि पकड़ी गई साढ़े चार किलो अफीम में शुुद्ध अफीम तीन किलो ही है, इसमें डेढ़ किलो हेल्थ सप्लीमेंट मिलाकर वजन साढ़े चार किलो किया गया है। वजन बढ़ाने के लिए वे अफीम में धूपबत्ती का चूरा भी मिलाते हैं। इसे बिना लैब में जांच कराए नहीं पकड़ा जा सकता है।