बरेली। सरकार ने नए टैक्स स्लैब को लागू करने के साथ ही सभी तरह की छूट जैसे 80सी आदि को समाप्त करने की बात कही है। इन्कम में छूट की कटौती हटने से इनकम ज्यादा दिखेगी जिस पर टैक्स भी ज्यादा लगेगा। 15 लाख तक के आय वालों के
लिए तो फिर भी ठीक है, पर इससे ऊपर के आय वाले लोगों की परेशानी बढ़ेगी। बरेली कॉलेज के कामर्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर व अर्थशास्त्री डॉ. राजीव मेहरोत्रा के अनुसार, इस नई स्कीम से लोगों को नुकसान होगा। साथ ही बचत योजनाओं को धक्का लगेगा।
डॉ. राजीव मेहरोत्रा के अनुसार, अब 15 से 25 लाख आय पर तीन प्रतिशत तक कर लगेगा। वहीं अब तक 80सी और अन्य योजनाओं के तहत टैक्स में छूट पाने को एलआईसी व अन्य बचत स्कीमों में पैसा लगाकर लोग ढाई लाख रुपये तक की छूट ले लेते थे, पर अब यह छूट उन्हें नहीं मिल सकेगी। जैसे यदि कोई 25 लाख रुपये कमाता है तो पुराने स्लैब में योजनाओं के तहत ढाई लाख की छूट के बाद साढ़े 22 लाख पर कुल छह लाख 75 हजार रुपये देने होते थे। नई व्यवस्था के तहत उसे साढ़े सात लाख रुपये देने होंगे। वहीं छूट को बंद करने से लोग एलआईसी, हेल्थ इंश्योरेंस आदि स्कीमोें में निवेश करना कम कर देंगे, जिससे बचत योजनाएं प्रभावित होंगी और सरकार के पास विकास के लिए रुपया भी कम आएगा, जो कहीं न कहीं विकास कार्यों को प्रभावित करेगा। डॉ. राजीव के अनुसार ऐसी स्थिति में लोग नए टैक्स स्लैब की जगह पुराने टैक्स स्लैब को ही अपनाएंगे।
डिविडेंट पर टैक्स लगाने से ही गिरा शेयर मार्केट
अब तक शेयरों पर हर वर्ष मिलने वाला डिविडेंट सरकार की ओर से टैक्स फ्री होता था। पर अब सरकार ने इस पर टैक्स लगाने का फैसला कर लिया है। इससे शेयर धारकों को काफी धक्का लगा है। यही वजह थी कि शनिवार को शेयर मार्केट करीब एक हजार अंक का गोता खा गया। सरकार की इन नीतियों से शेयर मार्केट के माध्यम से व्यापार जगत को मिलने वाला निवेश भी प्रभावित होगा। इससे मार्केट से पैसा उठाकर औद्योगिक इकाईयां लगाने और रोजगार सृजन की प्रवृत्ति भी प्रभावित होगी।