फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस का अजब कारनामा: कोर्ट ने कहा- इंस्पेक्टर को नहीं कानून की जानकारी, कैसे चला रहे थाना; सीओ समेत किया तलब

Fri, 13 Oct 2023 04:18 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के बिथरी चैनपुर थाने की पुलिस का अजब कारनामा सामने आया है। कोर्ट में जब मामला पहुंचा तो पुलिस की बड़ी गलती पकड़ी गई। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए सीओ और थाने के इंस्पेक्टर को तलब किया है। 
विज्ञापन
बिथरी चैनपुर थाना - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली के बिथरी चैनपुर थाने में उस धारा के तहत रिपोर्ट दर्ज करा दी गई, जिसका कानून में प्रावधान ही नहीं है। इंस्पेक्टर की गलती पर गौर न करते हुए सीओ तृतीय ने भी एफआईआर की प्रति ज्यों की त्यों कोर्ट भेज दी। एसीजेएम रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट ने न सिर्फ इस खामी को पकड़ लिया, बल्कि दोनों अधिकारियों को यह कहते हुए 18 अक्तूबर को तलब किया कि क्यों न माना जाए कि आप दोनों को कानून की जानकारी ही नहीं है।

विज्ञापन


बिथरी के सैदपुर खजुरिया निवासी तौकीर रजा खां ने थाने में गांव फरीदापुर चौधरी के जफीर अतहर व शोएब मुहम्मद के खिलाफ अमानत में खयानत, मारपीट के आरोप में तहरीर दी थी। इसमें जिक्र था कि अभियुक्तों ने जो चेक दिया वह भी डिसऑनर हो गया। 

ये भी पढ़ें- Bareilly: 'इस्राइल-फलस्तीन युद्ध बंद कराने के लिए पीएम मोदी करें पहल', मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने की अपील
विज्ञापन


इंस्पेक्टर ने लगाई थी ये धारा 
इंस्पेक्टर ने जो रिपोर्ट कराई, उसमें आईपीसी की धाराओं के अलावा 138 परकाम्य लिखित अधिनियम 1881 अर्थात 138 निगोशियेबिल इंस्ट्रुमेंट की धारा भी बढ़ा दी, जबकि कानून में ऐसा प्रावधान नहीं है। कोर्ट के सामने यह मामला आया तो आदेश किया कि कानून यह है कि जब कोई व्यक्ति बैंक में चेक जमा करता है और वह अनादरित यानि डिसऑनर हो जाता है तो शिकायत का अधिकार उस व्यक्ति को है, जिसके पक्ष में चेक लिखा गया है। 

यह परिवाद सक्षम न्यायालय में दाखिल किया जा सकता है। इस अधिनियम के तहत किसी हालत में रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकती। थाना प्रभारी ने अपने अधिकार क्षेत्र के परे जाकर 138 एनआई एक्ट के तहत मुकदमा किया है। 

कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी 
कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि थानाध्यक्ष संजय तोमर को कानून की जानकारी नहीं है। यह क्यों न माना जाए कि उनको थाना चलाने के बारे में भी मूलभूत जानकारी नहीं है। कोर्ट ने सीओ आशीष प्रताप सिंह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस रिपोर्ट को उन्होंने तकमीला (निष्पादित) किया है। ऐसा लगता है कि उन्हें तकमीला में रुचि नहीं है। पेशी क्लर्क जिस तरह से पेपर रख जाते हैं, वह उस पर हस्ताक्षर करके दायित्चों की इतिश्री कर लेते हैं। 
विज्ञापन

लगता है कि सीओ को भी कानून की जानकारी नहीं है। क्यों न ये माना जाए कि उन्हें कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने दोनों अफसरों को तलब करते हुए कहा है कि वह स्पष्टीकरण दें कि उनके खिलाफ क्यों न दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें