शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव में चल रही श्रीराम कथा में व्यास विजय कौशल महाराज ने सती अनसूया, शूर्पणखा और मारीच का प्रसंग सुनाया। बोले कि जिस घर में कीर्तन होता है, वहां कलह नहीं होती। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रोता भावविभोर हो गए।
व्यास ने कहा कि एक बार नारद जी विचरण कर रहे थे, तभी उन्होंने तीनों देवियों मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां पार्वती को सतीत्व और पवित्रता के विषय में परस्पर विमर्श करते देखा। नारद जी ने उन्हें अत्रि महामुनि की पत्नी अनसूया के असाधारण पातिव्रत्य के बारे में बताया और कहा कि उनके समान पवित्र और पतिव्रता तीनों लोकों में नहीं है। तीनों देवियों को मन में अनसूया के प्रति ईर्ष्या होने लगी और उन्होंने सती अनसूया के पातिव्रत्य को खंडित करने के लिए अपने पतियों से कहा। पहले वह नहीं माने लेकिन विशेष आग्रह पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने सती अनसूया के सतीत्व और ब्रह्मशक्ति को परखने की सोची।
भेष बदलकर वह अनसूया के पास पहुंचे तो उन्हें भोजन का निमंत्रण दिया गया, लेकिन त्रिदेवों ने अनसूया से निर्वस्त्र होकर भोजन परोसने को कहा, जिस पर उन्होंने त्रिदेवों पर जल छिड़ककर दिव्य शक्ति से उन्हें तीन प्यारे शिशुओं के रूप में बदल दिया। उसके बाद स्तनपान कराया, दूध-भात खिलाया, गोद में सुलाया और तीनों गहरी नींद में सो गए।
कथा के समापन पर आरती व प्रसाद वितरण हुआ। पूजन डॉ. रामनिवास गुप्ता, मिथिलेश गुप्ता ने किया। आरती में डॉ. सत्य प्रकाश मिश्रा, मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, व्यापारी नेता वेदप्रकाश गुप्ता, अजय अग्रवाल, संतोष उपाध्याय, दीपांजलि उपाध्याय, ओम सिंह शामिल रहे।