पॉलीथिन और कैरीबैग पर प्रतिबंध मजाक बनकर रह गया है। बाजारों में थोक और फुुटकर में पॉलीथिन भी पहले की तरह बिक रही है और दुकानदार इसमें सामान भी बेच रहे हैं।। प्रशासन की गाइड लाइन न मिलने के चलते नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण खामोश हैं। दोनों विभागों ने सरकारी गजट जारी होने के दूसरे दिन भी पॉलीथिन के विरोध में अभियान नहीं चलाया।
राज्य सरकार ने प्लास्टिक के बैग और पॉलीथिन (पैकेजिंग सामान को छोड़कर) पर प्रतिबंध लगाने का 21 जनवरी को गजट भी जारी कर दिया। मगर, अभी तक ये प्रतिबंध सिर्फ फाइलों तक सीमित है। प्रशासन की ओर से प्रतिबंध के आदेश को अमल में लाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रशासन की गाइड लाइन का इंतजार कर रहे हैं। प्रतिबंध लगने के दो दिन तक दोनों विभागों ने पॉलीथिन का प्रयोग रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए। प्रशासनिक मजिस्ट्रेट और पुलिस बल न मिलने के चलते चार दिन से चल रहा कूड़ा और गंदगी अभियान भी बीच में रुकता दिख रहा है। दोनों विभागीय अफसरों का कहना है कि पॉलीथिन प्रतिबंध पर अमल कराने के लिए सर्कुलर मिल चुका है लेकिन जब तक प्रशासनिक स्तर पर संयुक्त बैठक कर रणनीति नहीं बनेगी। तब तक प्रतिबंध के सरकारी आदेश पर अमल हो पाना मुश्किल है।
‘पॉलीथिन पर प्रतिबंध पर अमल नगर निगम, नगरपालिका और नगर पंचायतों को कराना है। छापेमारी भी इनको ही करनी है। हमें अगर कोई आदेश मिलेगा तो उस पर अमल कराएंगे।’ शशि बिंदुकर, एई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
‘पॉलीथिन प्रतिबंध पर सर्कुलर मिल चुका है। प्रशासनिक स्तर पर संयुक्त रणनीति बनने के बाद बाजारों में छापामारी अभियान चलाया जाएगा। अभी कूड़ा फैलाने वालों के चालान काटे जा रहे हैं।’ शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त