पहलवान साहब की दरगाह पर कुल रस्म अदा की गई।
उलमा की तकरीर और नातो मनकबत की महफिल सजी
बरेली। उर्स-ए-वासिल का बृहस्पतिवार को कुल की रस्म के साथ समापन हो गया। उलमा की तकरीर और महफिल के बाद मुल्क की खुशहाली और अवाम की सलामती के लिए दुआएं की गईं।
नावल्टी स्थित दरगाह शरीफ पर इन दिनों हजरत शाह वासिल शहीद उर्फ पहलवान साहब का चार रोजा 205वां उर्स मनाया जा रहा था। बृहस्पतिवार को उर्स की शुरुआत सुबह कुरान ख्वानी से हुई। इसके बाद तकरीर का कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें कारी फुरकान रजा नूरी और शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने हजरत पहलवान साहब की जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही मुल्क की आजादी के लिए उनकी शहादत का भी जिक्र किया। इसके बाद नबीरे आला हजरत मौलाना तौकीर रजा खां की सरपरस्ती और डॉ. नफीस खान की सदारत में कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। आखिर में दरगाह के सज्जादानशीन फरहान रजा खान ने तबर्रुक तकसीम किया। निगरानी उर्स प्रभारी नोमान रजा खान की रही। उर्स की व्यवस्था में इमरान खान, मोहम्मद शफी, नदीम खान, अफजल बेग, इफ्तिखार कुरैशी, शहजाद पठान नियाजी, जाहिद रजा, शारिक बरकाती आदि का सहयोग रहा।