बरेली। ट्रेन की चपेट में आई 14 साल की लड़की को एलएलबी प्रथम सेमेस्टर के छात्र ने बचा लिया। प्रयोगात्मक परीक्षा के बावजूद उसने इंसानियत के इम्तहान में शामिल होना जरूरी समझा। लड़की को सब्जी के ठेले में बाजार तक लाया। 108 एंबुलेंस बुलाई। सीएचसी पहुंचकर बरेली रेफर करने की बात आई तो डीएम और सीएमएस को फोन भी कर दिया। जिला अस्पताल में ऑपरेशन के बाद किशोरी के एक हाथ और कलाई को काटना पड़ा मगर जान बच गई।
हादसा बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे फरीदपुर में मानव रहित क्र ासिंग पर हुआ। नवादा बिलसंडी के बादाम सिंह की पत्नी मिथलेश अपनी बहन धन देवी और बेटी रिंकी के साथ सब्जी खरीदने बाजार गई थीं। क्रासिंग पार करते समय दूर से ट्रेन दिखाई दे रही थी। मिथलेश और धनदेवी ने दौड़कर ट्रैक पार कर लिया मगर रिंकी ट्रेन की चपेट में आ गई। धक्का लगते ही वह दस कदम दूर जा गिरी। उसका दायां हाथ, बायीं कलाई और पैर बुरी तरह जख्मी हो गए। प्रत्यक्षदर्शियाें के अनुसार रिंकी तड़पती रही। मां और मौसी बदहवास हो गए। हादसे के बाद वहां भीड़ जमा हो गई। भीड़ में शामिल नवादा बिलसंडी गांव निवासी सिल्वर लॉ कालेज के एलएलबी प्रथम सेमेस्टर के छात्र अवध किशोर चौधरी से रहा नहीं गया। वह प्रयोगात्मक परीक्षा देने जा रहा था। उसने तमाशबीन बने लोगों को हटाया और सब्जी के ठेले में रिंकी को लाद दिया। जब तक 108 एंबुलेंस आती वह ठेले को बाजार तक ले आया था। फरीदपुर सीएचसी से जवाब मिलने पर उसने डीएम को हादसे की जानकारी दे दी। सीएमएस एंबुलेंस के जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही इमरजेंसी में तैनात हो गए। सर्जन डॉ. अनिल अग्रवाल और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. केएस गुप्ता ने रिंकी का ऑपरेशन किया। अवध पाल ने लड़की को एक यूनिट खून भी दिया। डॉक्टरों ने कहा कि अगर देर होती तो लड़की की जान जा सकती थी।