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बरेलीः भर्ती हुआ कोरोना का संदिग्ध मरीज तो वार्ड का रास्ता भूल गया स्टाफ

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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कोरोना की दहशत आम लोगों से ज्यादा रविवार को जिला अस्पताल के स्टाफ में दिखी। कोरोना वार्ड में एक संदिग्ध मरीज के भर्ती होने के बाद उसकी देखरेख और इलाज की जिम्मेदारी भूलकर स्टाफ वार्ड में ही जाने से कतराता रहा। सुभाषनगर में रहने वाला कोरोना का यह संदिग्ध मरीज खांसी-जुकाम, बुखार और सांस लेने में तकलीफ लेने जैसे लक्षणों के साथ 24 फरवरी को केन्या से लौटा था। 12 दिन बाद भी स्वास्थ्य में कोई सुधार न होने पर परिवार के लोग उसे अस्पताल लेकर पहुंचे थे। जांच के लिए उसका ब्लड सैंपल लखनऊ भेजा गया है।

स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक कोरोना के संदिग्ध मरीज के केन्या से लौटने की जानकारी मिलने के बाद 24 फरवरी को ही उससे संपर्क कर अपनी जांच कराने को कहा गया था मगर उसने जांच कराने से इनकार कर दिया था। अब उसके परिवार वालों ने बताया है कि उसे खांसी-जुकाम और बुखार के साथ सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी जो अब और बढ़ गई है। रविवार को यह व्यक्ति पत्नी के साथ जिला अस्पताल पहुंचा तो उसमें कोरोना जैसे लक्षण मिलने के बाद सीएमओ के निर्देश पर फौरन कोरोना वार्ड में भर्ती करा दिया गया, साथ ही ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया।

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जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि लखनऊ से जांच रिपोर्ट आने में कुछ दिन लग सकते हैं। हालांकि कोरोना की पुष्टि होने से पहले जिला अस्पताल में संदिग्ध मरीज की आमद से हड़कंप जैसी स्थिति पैदा हो गई। अस्पताल के जिस स्टाफ पर कोरोना मरीजों के इलाज और देखभाल की जिम्मेदारी है, वह सारी जिम्मेदारी भूलकर कोरोना वार्ड में भी जाने से बचता रहा। संदिग्ध मरीज के परिवार के लोग चिंतित हालत में काफी देर वार्ड के बाहर खड़े होकर जिला अस्पताल के स्टाफ का यह रवैया देखते रहे। इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया कि अगर किसी मरीज में वाकई कोरोना की पुष्टि हो गई तो जिला अस्पताल में उसका इलाज कैसे होगा।

फ्रांस से लौटे दो और युवकों की होगी जांच

सीएमओ के मुताबिक पहले भी कई लोगाें की जांच कराई जा चुकी है लेकिन अब तक किसी में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है। अभी दो और युवकों की जांच होनी है। यह प्रेमनगर और सिविल लाइंस के रहने वाले हैं और दोनाें ने हाल में ही फ्रांस की यात्रा की है। हालांकि दोनों ने अभी स्वास्थ्य संबंधी कोई शिकायत नहीं की है। फिर भी एहतियातन दोनाें को जांच कराने के लिए जिला अस्पताल बुलाया गया है।

कोरोना वार्ड में भर्ती हुआ व्यक्ति देश के बाहर से लौटा है। उसे खांसी, जुकाम, बुखार और सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हम यह नहीं कह सकते हैं कि वह कोरोना वायरस से संक्रमित है लेकिन एहतियातन उसकी जांच कराई गई है। ब्लड सैंपल भी जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। -डॉ. विनीत कुमार शुक्ल, सीएमओ

अपनी सफाई पर दें सबसे ज्यादा ध्यान

डॉक्टरों की हिदायत है कि सफाई के लिए हाथों को घंटे-दो घंटे के अंतराल पर लगातार धोते रहें। हाथ गंदे न होने पर भी धोएं। धोने के बाद टिश्यु पेपर या ड्रायर से सुखाएं। अपना तौलिया का किसी दूसरे का प्रयोग न करने दें और न किसी और का तौलिया इस्तेमाल करें। छींकने और खांसने के दौरान मुंह पर हाथ रखें।

ऐसे में जरूर हाथ धोएं

छींकने और खांसने के बाद
बीमार व्यक्ति से मुलाकात के बाद
शौचालय के इस्तेमाल के बाद
खाना बनाने, खाने से पहले और खाने के बाद
पशुओं को छूने के बाद

छींकने-खांसने वालों से रहें दूर

जो लोग छींक रहे हों, उनसे दूरी बनाकर रखें। सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण कोरोना वायरस के भी हैं, ऐसे में जब कोई आपके आसपास छींक रहा हो तो उससे दूर हट जाएं और अपने मुंह को ढकने की कोशिश करें।

जरूर लगाएं मास्क

यह बहुत आम सुरक्षा है। आम तौर पर कई लोग मास्क लगाने से बचते हैं मगर कोरोना वायरस के खतरे से बचने के लिए तब इसे पहनना जरूरी है, जब आप घर से बाहर भीड़भाड़ वाली जगह जा रहे हों। डॉक्टरों के अनुसार, इससे इन्फेक्शन का खतरा काफ ी कम हो जाता है। हो सके तो एन-95 मास्क का ही इस्तेमाल करें।

ऐसा करने से बचें

- खांसी और बुखार हो तो लोगों से दूरी बनाए रखें।

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- अपनी आंख, मुंह और नाक को बार-बार न छुएं।
- सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।
- खेतों की ओर जाने, जीवित पशुओं के बाजार में जानें से बचें।
- जीवित पशुओं के संपर्क में आने और अधपके मांस को खाने को बचें।
- जहां जानवर का वध किया जाता हो, वहां जानें से बचें।

ये लक्षण दिखे तो हो जाएं सावधान

- बुखार, खांसी और जुकाम हो तो यात्रा न करें।
- अचानक तेज बुखार होना।
- तेज बुखार, जुकाम और खांसी होना।
- शरीर में तेज दर्द के साथ कमजोरी।
- लिवर और किडनी में परेशानी।
- सांस लेने में तकलीफ होना।
- निमोनिया के लक्षण दिखना।
- पाचन क्रिया में अचानक तकलीफ होना।
- ऐसा होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।

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