इसी नंबर से किया गया था फोन, जो अब बंद है।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
शिक्षक के आत्महत्या करने का मामला
- 24 जून को फोन करके शाम तक रुपये देने का बनाया था दबाव
- परिजन बोले- फोन आने के बाद ही डिप्रेशन में आ गए थे चंद्रपाल
बरेली। शिक्षक के आत्महत्या करने के मामले में प्रेमनगर पुलिस कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है। सूदखोरों के खिलाफ रिपोर्ट भले ही मीरगंज थाने में दर्ज की गई हो, लेकिन घटना के पूरे तार प्रेमनगर से जुड़े हैं। शिक्षक चंद्रपाल को यहीं के एक सिपाही ने फोन करके शाम तक रुपये देने के लिए धमकाया था। सिपाही ने शिक्षक से कहा, अगर शाम तक कपिल छाबड़ा को रुपये न दिए तो जेल भेज दिया जाएगा। परिजन के मुताबिक, इस फोन के बाद ही चंद्रपाल डिप्रेशन में आ गए थे। हालांकि जिस नंबर से फोन किया गया था वह अब बंद जा रहा है।
बड़े भाई चंद्रप्रकाश ने बताया कि सूदखोर लगातार फोन करके चंद्रपाल को धमका रहे थे। उन्होंने बताया कि 24 जून की दोपहर चंद्रपाल के मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन उनकी पत्नी गीता ने उठाया। फोन करने वाले ने खुद को प्रेमनगर थाने का सिपाही बताया। ट्र कॉलर पर भी थाना प्रेमनगर और नाम नीरज लिखकर आ रहा था। इसके बाद फोन करने वाले ने गीता को धमकी दी कि कपिल छाबड़ा को शाम तक रुपये नहीं लौटाए तो चंद्रपाल को जेल भेज दिया जाएगा। गीता ने यह बात पति चंद्रपाल को बताई तो वह डिप्रेशन में आ गए और फिर कपिल छाबड़ा से मिलने चले गए। कपिल ने दो घंटे तक उन्हें बाहर बैठाए रखा। इसके बाद जमकर हड़काया। इसके बाद 29 जून को चंद्रपाल ने आत्महत्या कर ली।
चूंकि शिक्षक का शव मीरगंज थाना क्षेत्र में मिला, इसलिए रिपोर्ट वहीं दर्ज हुई है। मीरगंज पुलिस ही मुकदमे की विवेचना कर रही है। मीरगंज इंस्पेक्टर दयाशंकर का कहना है कि इस मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अगर ऐसा कुछ है तो जांच की जाएगी। पता लगाया जाएगा कि जिस नंबर से कॉल की गई थी वह किसका है। इधर, इंस्पेक्टर प्रेमनगर इंस्पेक्टर शितांशु शर्मा भी जांच करने की बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि हो सकता है किसी ने मोबाइल में प्रेमनगर थाने का नाम से नंबर सेव कर लिया हो।
वर्ष 2019 से सूदखोरों के चंगुल में फंसे थे शिक्षक
शिक्षक चंद्रपाल 2019 से सूदखोरों के चंगुल में फंसे थे। दरअसल, उन्होंने घर के पास बसंत विहार कालोनी में किराये की दुकान में कपड़े का व्यापार शुरू किया था। इसके लिए कपिल हौजरी के मालिक कपिल छाबड़ा से कुछ सामान उधार लिया था। इसी दौरान उन्होंने संतोष, पप्पू, गुड़िया से थोड़े-थोड़े रुपये उधार लिए थे। संतोष से करीब डेढ़ साल पहले एक लाख रुपये लिए थे। यह रकम लौटा दी, लेकिन उसका ब्याज खत्म नहीं हुआ। पप्पू से 50 हजार रुपये लिए थे। वह हर महीने ब्याज पर ब्याज लगाता था। दोगुने रुपये लेने के बाद भी उसका ब्याज खत्म नहीं हो रहा था। यही हाल गुड़िया का था। तीनों सूदखोर दोगुने से ज्यादा रुपये वसूल चुके थे, इसके बावजूद वे रकम बकाया बताकर शिक्षक पर दबाव बना रहे थे।
एक ओर सूदखोर गिरफ्तार, बाकी फरार
आरोपी संतोष को मीरगंज पुलिस ने बुधवार रात ही गिरफ्तार कर लिया था। बृहस्पतिवार को उसे जेल भेज दिया गया। संतोष से शिक्षक ने डेढ़ साल पहले करीब एक लाख रुपये उधार लिए थे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने पप्पू को भी पकड़ लिया। पुलिस ने गुड़िया और कपिल छाबड़ा की तलाश में भी दबिश दी लेकिन दोनों फरार हैं। उनके परिजन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दोनों की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हुई हैं। यहां बता दें कि अपने सुसाइड नोट में शिक्षक ने सूदखोरों में सबसे खतरनाक कपिल छाबड़ा को ही बताया है। वह उनकी पत्नी और बच्चों तक को धमकी दे रहा था।