बरेली। आईएमए ब्लड बैंक के सफाई कर्मचारी और उनके साथियों का गिरोह मरीजों की जरूरत व तीमारदारों की हैसियत देखकर खून की कीमत करता था। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पांच से दस हजार रुपये तक में खून का सौदा किया था। इस दौरान वह इस बात पर भी ध्यान नहीं देते थे कि नशेड़ियों का खून संक्रमित भी हो सकता है, जिससे भविष्य में खून लेने वाले मरीज को समस्या हो सकती है।
करीब साल भर से यह गिरोह काफी सक्रिय था। दरअसल पिछले साल भी दिहाड़ी मजदूरों के खून की सौदेबाजी करने वाला युवक पकड़ा गया था। उसने बताया था कि खून के बदले मजदूरों को दो हजार रुपये दिए जाते थे, बाकी रकम वह लोग रख लेते थे। उस सिलसिले में कोतवाली पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की तो नई बातें सामने आती रहीं।
कोतवाल अमित पांडेय ने बताया कि गंभीर मरीजों के तीमारदार किसी भी कीमत पर अपने मरीज के लिए डोनर ढूंढते हैं। ऐसे तीमारदारों को विनीत और अभय भांप जाते थे। दोनों लोग तीमारदार से उनके मरीज की जानकारी लेते थे। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें प्रेमनाथ और धीरेंद्र के पास भेज देते थे। इसके बाद प्रेमनाथ और धीरेंद्र मुंहमांगी कीमत लेकर बीमार और लाचार डोनर उपलब्ध कराते थे। ब्यूरो
नहीं चला ठेले और कोरियर का काम तो करने लगे खून का धंधा
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि हाईस्कूल फेल प्रेमनाथ आईएमए के बाहर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन दफ्तर के सामने जूस का ठेला लगाता है। प्रेमनाथ की पहचान ब्लड बैंक कर्मचारी अभय और विनीत से हो गई। दोनों ने खून के धंधे से होने वाले फायदे के बारे में बताया तो प्रेमनाथ गरीब, लाचार लोगों का खून निकलवाने लगा। बीए पास धीरेंद्र शर्मा कोरियर का काम करता था। उसकी नजदीकी भी विनीत और अभय से हो गई थी। दोनों ने उसे भी खून बेचकर मुनाफा कमाने के बारे में बताया। धीरेंद्र भी गरीब, नशेड़ियों को लाकर उनका खून निकलवाता और महंगे दामों पर इसका सौदा करता था।
आरोपियों के नेटवर्क का पता करेगी पुलिस : एसपी सिटी
- चारों आरोपियों के मोबाइल की पुलिस जांच कर रही है। इन्होंने कितने लोगों का खून निकलवाया, यह खून किन मरीजों के तीमारदारों ने लिया। इन आरोपियों के नेटवर्क में और कितने लोग हैं, जैसे सवालों का जवाब कोतवाली पुलिस विवेचना में तलाश करेगी। अन्य लोगों के नाम जुड़ेंगे तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
- मानुष पारीक, एसपी सिटी