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Bareilly News: अफसर जानते हैं उड़ रही धूल... फिर भी रोकथाम के इंतजाम मिट्टी में; लोग हो रहे बीमार

Sat, 25 Nov 2023 02:49 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के वातावरण में धूल की परत बिछ रही है। जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। लोग बीमार हो रहे हैं, लेकिन अफसर आंकड़ेबाजी में उलझे हुए हैं। सब जानते हुए भी रोकथाम के ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।  
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सड़क पर उड़ रही धूल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली की हवा में उड़ रही धूल लोगों को बीमार बना रही है। शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 200 के आसपास दर्ज हो रहा है। बृहस्पतिवार को हुई बैठक में नगर निगम के मुख्य अभियंता ने भी इस बात को माना था कि बेतरतीब निर्माण कार्यों की वजह से धूल उड़ रही है। इसके बाद भी नियंत्रण के नाम पर अनदेखी की मिट्टी डाली जा रही है। न तो निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव हो रहा है, न ही उसे ढका गया है।

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दूसरी ओर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आंकड़ेबाजी में उलझा हुआ है। तीन साल पहले शहर के आवासीय और व्यावसायिक इलाकों में ऑनलाइन वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किए गए थे। वर्ष 2020 से पहले शहर का एक्यूआई 300 के पार दर्ज हो रहा था। बरेली अति वायु प्रदूषित शहर की सूची में दर्ज हो रहा था। 

निगरानी केंद्र स्थापित होने के बाद एक्यूआई सामान्य दिनों में सौ से भी कम और ट्रैफिक, बेतरतीब निर्माण और धूल के गुबार की स्थिति में दो सौ के आसपास दर्ज हो रहा है। दिवाली पर भी यही स्थिति रही। इससे जाहिर है कि आंकड़ों में खेल हो रहा है।

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निर्माण कार्य के दौरान मानकों की अनदेखी
वायु प्रदूषण से निजात के लिए एनजीटी ने निर्माण कार्य के दौरान पानी का छिड़काव करने, खोदाई/ध्वस्तीकरण के दौरान धूल के फैलाव को रोकने के लिए हरी चादर लगाने, सड़कों की नियमित सफाई और धूल उठने पर पानी का छिड़काव करने के निर्देश दिए हैं। कार्यदायी संस्थाओं को नियमों से कोई सरोकार नहीं। कुतुबखाना पुल, सिविल लाइंस में सीवर लाइन बिछाने, बदायूं रोड, पीलीभीत बाइपास पर चल रहे निर्माण के दौरान एक-दो बार पानी का छिड़काव कर खानापूर्ति की जा रही है। राहगीर धूल के गुबार के बीच से गुजर रहे हैं।

जिन इलाकों में प्रदूषण ज्यादा, वहां नहीं होती निगरानी
एक वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र आवासीय इलाकों में बनना था। लिहाजा, राजेंद्रनगर स्थित क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय में ही केंद्र बना दिया। यह शहर का पॉश इलाका है। व्यवस्थित बसा है। हरियाली है। जाम की स्थिति नहीं रहती। दूसरा केंद्र जीआईसी स्कूल के मैदान में झाड़ियों के बीच में है। वहां लोगों की आवाजाही भी नहीं होती और निर्माण कार्य की धूल सिस्टम तक कभी-कभार ही पहुंचती है। 

सिविल लाइंस इलाके के निगरानी केंद्र के पास निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसके आसपास पानी का निरंतर छिड़काव होता रहता है, फिर भी एक्यूआई 200 रहता है। इधर, पीलीभीत बाइपास, लाल फाटक, करगैना रोड, मिनी बाइपास पर धूल का गुबार रहता है। वहां निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है।

आगामी दिनों में और बढ़ेगा प्रदूषण का स्तर
बरेली काॅलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष व पर्यावरणविद डॉ. आलोक खरे के मुताबिक इस समय सुबह-शाम तापमान कम और नमी अधिक होने से धूल के कण संघनित होकर धुंध की पर्त की तरह वातावरण में छा रहे हैं। सुबह कोहरा कम पर धुंध का स्तर ज्यादा रहता है। जैसे-जैसे वातावरण में नमी बढ़ेगी, सुबह-शाम और धुंध छाएगी।  
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तर्क : एक किमी तक दर्ज होता है एक्यूआई
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी रोहित सिंह के मुताबिक मानकों के अनुसार ही दोनों जगह निगरानी केंद्र स्थापित हैं। सघन बस्ती या बाजार के बीच स्टेशन बनाना मुमकिन नहीं। निगरानी केंद्र एक किमी से ज्यादा के क्षेत्र में मौजूद धूल के कणों का औसत मापने में सक्षम है। हवा की गति भी एक्यूआई को प्रभावित करती है। धीमी गति पर एक्यूआई अधिक और तेज गति पर कम दर्ज होता है।

अस्थमा, ब्रोकाइटिस व अन्य सांस रोगी परेशान
चेस्ट फिजिशियन डॉ. पुनीत गोयल के मुताबिक वायु प्रदूषण की वजह से सांस रोगियों की परेशानी बढ़ रही है। प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों की बीमारी से हृदय और ब्लड वेसेल संबंधी विकार का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा त्वचा, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एम्फीसेमा, एलर्जी, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के मरीजों की भी तकलीफ बढ़ी है। वे परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।
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