मरीजों को त्वरित बेहतर इलाज तो क्या, सरकारी अस्पतालों में फर्स्टएड तक नहीं मिल पा रही है। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार को बिथरी चैनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर देखने को मिला। यहां मरीज को लेकर पहुंचे घरवालाें को एक घंटे तक डॉक्टर का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान रोगी छटपटाता रहा। जब डॉक्टर नहीं आए तो मरीज को जिला अस्पताल ले जाने के लिए घरवालों ने 108 एंबुलेंस से गुजारिश की तो स्टाफ ने बिना रैफर लेटर के मरीज को ले जाने से मना कर दिया। घरवालों ने ज्यादा कहा तो उनसे पैसे मांगे गए। मजबूर घरवाले बाइक से मरीज को बरेली ले गए।
बिथरी चैनपुर के गांव नौगवां निवासी विजय शर्मा (25) की शुक्रवार दोपहर हालत बिगड़ गई। घरवालाें ने बताया कि उन्हें किसी ने चिकन में कोई नशीला पदार्थ खिला दिया था। इससे वह बेहोश हो गए थे। घरवालों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया तो वह 45 मिनट बाद पहुंची। घरवाले एंबुलेंस से निजय को बिथरी चैनपुर पीएचसी लेकर पहुंचे। उस वक्त वहां कोई डॉक्टर नहीं था। विजय के भाई सुधीर ने पता किया तो नर्स ने डॉक्टर के एक घंटे में आने की बात कही। एक घंटे से ज्यादा वक्त तक इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर नहीं आए तो घरवाले परेशान हो गए। उधर, विजय की हालत भी तेजी से बिगड़ती जा रही थी। वह बुरी तरह छटपटा रहे थे। घरवालों ने 108 एंबुलेंस स्टाफ से जिला अस्पताल छोड़ने के लिए कहा तो उसने बिना रैफर लेटर के मरीज को ले जाने से मना कर दिया। सुधीर का कहना है कि ज्यादा कहा तो एंबुलेंस स्टाफ पैसे मांगने लगा। इस पर विजय को बाइक से बरेली लाया गया। विजय का जिला अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज चल रहा है।
पहली बार नहीं हुआ है ऐसा
15 जनवरी, 2017- एक अचेत युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 एंबुलेंस नहीं पहुंची। ठेले पर लिटाकर जिला अस्पताल लाया गया।
21 सितंबर, 2017- प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को एंबुलेंस ईंधन न होने की वजह से नहीं मिल पाई। उसका पति बाइक से अस्पताल लाया।
3 नवंबर, 2017- बारादरी थाने के सामने बीमार पड़ी वृद्धा को अस्पताल ले जाने के लिए 108 को फोन किया लेकिन वह नहीं पहुंची।
कोट
108 और 102 एंबुलेंस के खिलाफ किसी भी शिकायत पर कार्रवाई करना मेरे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इनके संबंध में कोई शिकायत भी नहीं आई है, लेकिन अगर शिकायत आती है तो शासन से कार्रवाई की संस्तुति जरूर की जाएगी।
- डॉ. विनीत शुक्ला, सीएमओ