फरीदपुर। इलाके के कई गांवों में बाघ को लेकर दहशत बरकरार है। ग्रामीण रात भर जाग कर काट रहे हैं तो जरा सी आहट पर मोर्चा बनाकर निकल पड़ते हैं। वहीं, वन विभाग ने यह कहकर कांबिंग बंद कर दी है कि इलाके में बाघ नहीं हैं, ग्रामीणों में अफवाह फैलने से यह स्थिति बनी है।
करीब चार दिन से भुता के सुनौरा मुरारपुर, सुन्हा, गुलड़िया मकरंदपुर, सिमरा, ब्राह्मपुर समेत कई गांव में बाघ को लेकर दहशत फैली है। यूं तो बाघ को आमने सामने किसी ने देखा नहीं है लेकिन ग्राम गणेश खेड़ा निवासी मनोज और फिर अशोक सिंह पर रात में बाघ जैसे जानवर के हमले से ग्रामीणों में बाघ का डर समा गया है। एक नीलगाय भी जंगल में मृत मिली जिसके शरीर पर जानवर के हमले के निशान लग रहे हैं। ऐसे में रात में ग्रामीण खुद अपनी और अपने जानवरों की सुरक्षा के मद्देनजर मोर्चा संभाले रहते हैं। जरा सी आहट पर शोरशराबा शुरू हो जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि एक नीलगाय को मार दिया गया। अशोक सिंह पर हमला बोल दिया जिससे उनकी बाइक गिर गई और वह घायल हो गये।
वहीं वन विभाग ग्रामीणों की इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं है। रेंजर का कहना है कि अव्वल तो ग्रामीणों ने बाघ देखा ही नहीं है। हो सकता है कि जंगली बिल्ली ने उन पर हमला किया हो। नीलगाय को अगर बाघ ने मारा होता तो वह उसे खाने के बाद ही किसी अन्य पर हमला करेगा जबकि शव पर ऐसे संकेत नहीं हैं। बताया कि कटीले रास्ते पर बाघ नहीं जाते हैं। बाघ की ऐसी कोई गतिविधि या पदचिन्ह क्षेत्र में नहीं हैं। तीन दिन तक उसे तलाशने के बाद अधिकारियों को जानकारी देकर कांबिंग बंद कर दी गई है।