भूमाफिया के कब्जे से जमीन छुड़ाने तक आंदोलन जारी रखने का एलान
अफसरों ने दी सफाई- कार्रवाई पर हाईकोर्ट का स्टे, किसानों ने पूछा- जहां स्टे नहीं वहां क्यों नहीं हो रही कार्रवाई
बरेली। मीरगंज तहसील के गांव रहपुरा जागीर में साढ़े आठ सौ बीघा जमीन भूमाफिया के कब्जे से मुक्त कराने के लिए दामोदर स्वरूप पार्क में धरने पर बैठे किसान मंगलवार को भी जमे रहे। सुबह जिला प्रशासन के अफसरों ने पुलिस बल के साथ किसानों को मनाने की कोशिश की। उन्हें बताया कि हाईकोर्ट का स्टे होने के कारण प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। किसानों ने जवाबी सवाल किया कि हाईकोर्ट का स्टे चंद कब्जेदार लाए हैं। बाकी कब्जों को क्यों नहीं हटाया जा रहा है।
अफसरों और किसानों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक हुई बातचीत बेनतीजा रही। बातचीत के बाद किसानों ने कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान कर दिया। सुबह करीब साढ़े दस बजे चकबंदी अधिकारी पीसी द्विवेदी अपनी टीम के साथ किसानों का धरना समाप्त कराने पहुंचे थे। उन्होंने किसान प्रतिनिधि तीरथराम से बातचीत की। उन्हें बताया कि पिछले महीने डीएम के निर्देश पर कब्जे हटाने के लिए जमीन की पैमाइश शुरू की थी। कुछ जमीन को कब्जा मुक्त भी करा दिया गया मगर 13 दिसंबर को वह कार्रवाई के लिए पहुंचे तो कुछ कब्जेदारों ने हाईकोर्ट का स्टे ऑर्डर दिखा दिया जिसके बाद कार्रवाई रोकनी पड़ी।
इस पर किसानों ने कहा कि चंद ही अवैध कब्जेदार स्टे ऑर्डर लाए हैं। उनकी जमीन की पैमाइश न की जाए लेकिन जो कब्जेदार कोर्ट नहीं गए हैं, उनकी जमीन की पैमाइश जिला प्रशासन क्यों नहीं करा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि पहले गांव की पैमाइश के दौरान मिली बचत की जमीन ग्राम सभा को क्यों नहीं सौंपी गई। अफसर इन सवालों का किसानों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। किसानों ने कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान कर दिया।
फिर बोले किसान- विधायक के दबाव में रुकी पैमाइश
दामोदर स्वरूप पार्क पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि रहपुरा जागीर में ग्राम समाज की 850 बीघा जमीन पर भूमाफिया का कब्जा है। पिछले दिनों उनकी शिकायत पर जिला प्रशासन ने जमीन की पैमाइश कराकर उसे कब्जा मुक्त कराने का आदेश दिया तो पैमाइश भी शुरू हुई, लेकिन मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा के दबाव में पैमाइश रोक दी गई। दो दिन पहले रविवार की देर रात वह सांसद संतोष गंगवार से मिलने पहुंचे थे। मगर सकारात्मक पहल न होने पर वह सोमवार को कलक्ट्रेट पहुंचे और फिर आर-पार की लड़ने का एलान करते हुए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
अनहोनी हुई तो प्रशासन होगा जिम्मेदार
देर रात धरनास्थल पर बैठे किसान तीरथ सिंह, राजकुमार पाल, हरवंश प्रजापति, मोर सिंह, धर्मपाल प्रजापति, जगतपाल राजपूत, सुरेश, डालचंद्र, जयपाल, जोगराज, बुद्धसेन, भगवान दास, राधेश्याम, राजीव, जमुना प्रसाद आदि किसानों ने कहा कि उन्हें धरने से हटाने के लिए जिला प्रशासन ने उनकी सुरक्षा, शौचालय व्यवस्था, अलाव जलाने संबंधी मांगों को पूरा नहीं किया है। उन्हें अपने गांव से ही सारा सामान मंगाना पड़ रहा है। कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे बुजुर्गों की हालत बिगड़ सकती है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर कोई अनहोनी हुई तो उसका जिम्मेदार जिला प्रशासन होगा।
हाईकोर्ट में दाखिल करेेंगे आदेश पर काउंटर
चकबंदी अधिकारी पीसी द्विवेदी ने बताया कि हाईकोर्ट के स्टे के खिलाफ उनका विभाग काउंटर दाखिल करेगा। उन्होंने कहा कि रहपुरा जागीर चकबंदी में है। गांव में जमीन की पैमाइश होनी है। अब तक पैमाइश पूरी नहीं की जा सकी है और न ही चक काटे गए हैं। इसलिए बचत की जमीन कितनी होगी इस पर प्रक्रिया पूरी हुए बगैर कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने काउंटर फाइल क रने के बाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत आगे कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने किया समर्थन
मंगलवार सुबह किसानों के धरनास्थल पर पहुंचे पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने किसानों से पूरे प्रकरण की जानकारी ली और भूमाफिया पर कार्रवाई होने तक किसानों का साथ देने का वादा किया। पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि जानकारी के अनुसार पूरी जमीन पर अवैध कब्जा हो गया है। अगर कब्जेदार हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आए हैं तो वह भी किसानों के पक्ष में हाईकोर्ट में जाएंगे। उन्होंने कहा कि अफसरों ने ही कब्जेदारों को कोर्ट जाने का मौका दिया है। किसानों को इंसाफ दिलाने के लिए हम सब साथ हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार को भूमाफिया पर क ठोर कार्रवाई करने का अपना वादा निभाना ही होगा।