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बड़े नेताओं की अंतर्कलह पर स्थानीय नेता असमंजस में

Mon, 24 Oct 2016 01:37 AM IST
बरेली, ब्यूरो
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सपा की अंतर्कलह पर स्थानीय नेता असमंजस में हैं। अखिलेश और शिवपाल समर्थकों की राहें पहले से ही अलग हैं। मगर, आखिरी फैसला होने से पहले मुंह कोई नहीं खोलना चाहता। शिवपाल सिंह यादव के हाथ में संगठन की कमान आने के बाद एक तरह से उनके समर्थकों का कब्जा हो चुका है। उनके समर्थक अपने को मुलायमवादी बताकर पार्टी के एक होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं, वहीं चारो विधायक, पार्टी के पूर्व पदाधिकारी और फ्रंटल संगठन के युवा पदाधिकारियों के लक्ष्य भी तय हैं। सपा प्रत्याशियों को अखिलेश के साथ ही अपना भविष्य नजर आ रहा है। 
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चाचा भतीजे के बीच शुरू हुई सत्ता की जंग में शिवपाल और अखिलेश समर्थक साफ बंटे नजर आ रहे हैं। रविवार को चाचा शिवपाल सिंह समेत चार मंत्रियों की सरकार से बर्खास्तगी और देर शाम सपा के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के थिंक टैंक माने जाने वाले रामगोपाल यादव के छह साल के लिए निष्कासन के बाद तो भ्रम की स्थिति और बढ़ गई। सबकी नजर मुलायम सिंह यादव के फैसले पर है जो कि वह सोमवार को होने वाली बैठक में लेंगे। इसके बाद भी स्थानीय स्तर पर सपा नेता ये तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह किसके साथ खड़े हों। कुछ तो अपने फैसले को फाइनल टच देने के लिए बड़े नेताओं का पलड़ा हलका या भारी होने का इंतजार कर रहे हैं। रविवार को सपा नेताओं के अलावा विपक्षी दल और आम जनता के बीच अखिलेश यादव के दूसरी पार्टी बनाने की चर्चाओं का बाजार गरम रहा। बड़े नेताओं की इस बारे में कोई स्पष्ट घोषणा न होने के बाद भी शिवपाल समर्थक सपा के एक पदाधिकारी ने तो मुख्यमंत्री अखिलेश के नई पार्टी बनाने के लिए चुनाव आयोग में पंजीकरण की बात कही। यहां तक कि अखिलेश की नई पार्टी का नाम (राष्ट्रीवादी समाजवादी पार्टी) तक तय कर दिया।  सबकी राहे पहले से तय हैं लेकिन युवा जहां अखिलेश के चेहरे में पार्टी का भविष्य देख रहे हैं, वहीं बुजुर्ग मुलायम के खून पसीने से बनाई पार्टी की दुहाई देकर अप्रत्यक्ष रुप से शिवपाल के साथ हैं।  
 पहले से ही गुटबाजी से जूझ रही है सपा 
सपा में अंदरूनी कलह बड़े स्तर पर तो डेढ़ महीने पहले शुरू हुई है लेकिन बरेली के स्थानीय पार्टी नेताओं में सरकार बनने के समय से ही मतभेद रहे हैं। जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री होने के साथ सपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब उन्होंने जिलाध्यक्ष वीरपाल की मर्जी न होने के बाद भी अरविंद यादव, हरीशंकर यादव, संदेश कनौजिया को लखनऊ से नियुक्ति पत्र भेजकर जिला उपाध्यक्ष बना दिया था। सूरज यादव मुलायम यूथ ब्रिगेड और लोहिया वाहिनी में प्रदेश कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव का पद पाने में कामयाब रहे थे। मुख्यमंत्री के तीन बार बरेली आगमन पर बुजुर्गों के सापेक्ष युवाओं को तरजीह मिली। सपा के प्रदेश सचिव डा. अनिल शर्मा को एमएलसी टिकट मिलना और ऐन वक्त पर कटना भी स्थानीय नेताओं की गुटबाजी ही थी। इनमें मुलायम और अखिलेश समर्थकों की लामबंदी साफ नजर आ रही थी। हालांकि शिवपाल सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनते ही अखिलेश समर्थक संगठन से बाहर हो गए। 
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जिलाध्यक्षों की टिप्पणी

‘नाकामी और लूट खसोट को छिपाने के लिए यह ड्रापा सपा में मुलायम सिंह यादव परिवार की ओर से किया जा रहा है। भविष्य में भी लूट खसोट के लिए यह ताकत दिखाई जा रही है।’ ब्रह्मस्वरूप सागर, जोनल कोआर्डिनेटर, बसपा
 

‘मैं तो मुलायम वादी हूं। शिवपाल सिंह यादव हमारे प्रदेश अध्यक्ष हैं और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री। तीनों ही हमारे नेता है। बड़े नेताओं का जो भी घटनाक्रम हो रहा है, उसमें हम कोई भी टिप्पणी नहीं कर सकते।’ वीरपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष


‘सपा का परिवार बाद टूट के कगार पर है। पांच साल के कार्यकाल में जनता इन नेताओं से जवाब लेना चाहती है, उेस जवाब देही से बचने के लिए यह  सब किया जा रहा है।’ राम देव पांडे, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस
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