शाही। गांव दौली जवाहरलाल की गौंटिया में झोपड़ी में बंधी हजारीलाल की बकरी को रविवार रात करीब साढ़े तीन बजे तेंदुआ उठा ले गया। बकरियों के मिमयाने की आवाज सुनकर जागे हजारीलाल ने गांव वालों के साथ बकरी की तलाश की तो गन्ने के खेत में उसका अधखाया शव मिला। ग्रामीणों ने मामले की सूचना वन विभाग को दी, लेकिन कोई कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा।
गांव दौली जवाहरलाल की गौंटिया में हजारीलाल के घर के पड़ोस में ही उनकी झोपड़ी है। इसमें वह अपनी आधा दर्जन से अधिक बकरियां बांधते हैं। रविवार रात करीब साढ़े तीन बजे बकरियों के मिमयाने की आवाज सुनकर हजारीलाल जाग गए। उन्होंने झोपड़ी में जाकर देखा तो एक बकरी गायब थी। काफी देर तक आसपास ढूंढते रहे, लेकिन पता नहीं चला। इसके बाद ग्रामीणों के साथ बकरी की तलाश में निकले।
ग्रामीणों के मुताबिक तलाश के दौरान झोपड़ी के पास ही जंगली जानवर के पंजों के बड़े-बड़े निशान दिखे। पगचिह्नों का पीछा करते हुए गांव से बाहर खेतों में पहुंचे तो गन्ने के खेत में बकरी का अधखाया शव मिला। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए ने बकरी का शिकार किया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी पिछले साल 22 जून को प्रेमपुर गांव में धन सिंह की बकरी, एक जुलाई को पट्टी गांव के सोमपाल की बकरी, 22 जुलाई को बड़ेपुरा के बद्री प्रसाद की बकरी और 30 अगस्त को तुरसा पट्टी से शफी अहमद की बकरी को तेंदुआ निवाला बना चुका है। सोमवार सुबह ग्रामीणों की सूचना पर यूपी 112 पुलिस मौके पर पहुंची और तेंदुए के पगचिह्न देख ग्रामीणों से सजग रहने के लिए कहा। मीरगंज क्षेत्र के रेंजर संतोष सिंह का कहना है कि ग्रामीणों ने तेंदुआ के आने की उन्हें कोई सूचना नहीं दी है।