फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला... दूसरे वोटरों को भी खींच लाएंगे ब्राह्मण

विज्ञापन
बैठक को संबोधित करते सतीश चंद्र मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विज्ञापन

बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने इशारों-इशारों में कहीं तमाम बातें
विज्ञापन

भाजपा ने खूब शोर मचाकर भी जो नहीं किया, बसपा ने चुपचाप कर दिया
मायावती को दिया वृंदावन को साढ़े पांच सौ करोड़ का बजट देने का श्रेय

बरेली। जिन लोगों का मन भाजपा की सरकार से उचाट हो चुका है और सपा पर भी जिनको भरोसा नहीं है, बसपा से बेहतर उनके लिए कोई विकल्प नहीं है। बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने बुधवार को प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में यही संदेश दिया। प्रकारांतर से उन्होंने समझाया कि अगर ब्राह्मण और एससी वोटर एक हो जाते हैं तो दूसरे कई दूसरे समाजों के वोटरों का रुझान खुद ब खुद बसपा की तरफ हो सकता है।
प्रदेश की सत्ता से 14 वर्ष का वनवास खत्म करने के लिए 2007 की तरह बसपा फिर सोशल इंजीनियरिंग की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन ने यही जताया कि ब्राह्मणों के बूते 2007 में पूर्ण बहुमत से सत्ता में पहुंचने वाली बसपा को इस बार भी भरोसा है कि प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण उसके लिए फि र ब्रह्मास्त्र साबित हो सकते हैं। वोटरों पर भाजपा के हिंदुत्व का रंग फीका करने के लिए यह भी समझाया जा रहा है कि धर्म के लिए भाजपा ने तमाम दावों के बावजूद जितना नहीं किया, उससे ज्यादा बसपा की सरकार में बगैर किसी शोरशराबे के कर दिया गया था।
विज्ञापन

प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में सतीश चंद्र मिश्रा ने बसपा शासन में वृंदावन में साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख इसी परिप्रेक्ष्य में किया। उन्होंने बताया कि 2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद वह वृंदावन गए तो वहां सीवरेज सिस्टम के अभाव के साथ परिक्रमा मार्ग को कच्चा देखकर उन्हें अफसोस हुआ। उन्होंने वहां से लौटकर इसका जिक्र बसपा सुप्रीमो मायावती से किया तो उन्होंने वृंदावन का समग्र विकास कराने और बजट की कोई परवाह न करने को कहा। इसी के बाद वृंदावन में तमाम काम कराए गए।
विज्ञापन

बसपा महासचिव ने बातों ही बातों में यह भी समझाने की कोशिश की कि धर्म के मायने कहीं न कहीं ब्राह्मणों से भी जुड़े हुए हैं और जब ब्राह्मण ही भाजपा को सत्ता में लाने के बाद पछता रहे हैं तो साफ है कि धर्म की हानि भी हो रही है। ब्राह्मणों का सम्मान सिर्फ बसपा कर सकती है, यह कहते हुए उन्होंने इशारा किया कि मुस्लिमों को भी भाजपा के खिलाफ वोट करना है। अगर ब्राह्मण और एससी वोटर एक हुए तो मुस्लिम वोटरों का रुख भी बसपा की ओर हो सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें