बरेली। शहर में चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति के लिए वित्त वर्ष 2025-26 में 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए गए। इसके बावजूद कई इलाकों में आपूर्ति का बुरा हाल है। 33 केवी लाइनों के अक्सर ब्रेक डाउन होने से शहरवासियों को सात-आठ घंटे तक कटौती झेलनी पड़ती है। आपूर्ति में सुधार के लिए कराए गए कई काम घपले-घोटालों की भेंट चढ़ गए। विद्युत निगम ने अब बिजनेस प्लान 2026-27 पर काम शुरू कर दिया है।
पिछले साल गर्मियों में 33 व 11 केवी लाइनों में फॉल्ट, उपकेंद्रों की ओवरलोडिंग और लोकल फॉल्ट के कारण शहरवासियों को अंधाधुंध बिजली कटौती झेलनी पड़ी थी।
लाइनों के बदले जाने के बाद भी आपूर्ति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। उपकेंद्रों की क्षमता वृद्धि का भी असर नहीं दिख रहा है। शहर के कई इलाकों में एक साल में ही तीन-तीन बार लाइनों को बदला गया है।
पवन विहार में नया उपकेंद्र चालू कर दिया गया, लेकिन वह बार-बार ओवरलोड हो रहा है। सुभाषनगर, मढ़ीनाथ और किला उपकेंद्र को 220 केवी साउथ सिटी उपकेंद्र से जोड़ने का काम एक साल से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। जिन इलाकों में पिछले साल लाइनों को बदला गया था, उन्हीं इलाकों को नए बिजनेस प्लान और आरडीएसएस योजना के तहत फिर कार्ययोजना में शामिल कर लिया गया है।