बरेली। बंदरों के खौफ और आतंक से त्रस्त शहर के नागरिकों को अभी राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। नगर निगम की लचर कार्यशैली के चलते एजेंसी का चयन होने के बावजूद अभी तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया जा सका है। इस वजह से बंदरों को पकड़ने का अभियान ठप पड़ा है।
शहरभर में आए दिन मासूमों और बुजुर्गों को बंदरों द्वारा काटने के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजी खानापूर्ति करने में जुटे हैं। चौथी बार निकाली गई निविदा में 19 सितंबर को जावेद कॉन्ट्रैक्टर को 825 रुपये प्रति बंदर की दर से यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
निगम ने यह दावा किया था कि औपचारिकताएं पूरी होते ही हफ्ते भर के भीतर अभियान शुरू कर दिया जाएगा। पकड़े गए बंदरों को पीलीभीत तथा शाहजहांपुर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। वर्क ऑर्डर जारी न होने के चलते काम रुका हुआ है।
सिविल लाइंस, ग्रीन पार्क, गांधी उद्यान, शास्त्री नगर, संजय नगर, मॉडल टाउन, बिहारीपुर, आलमगिरिगंज, रामपुर गार्डन, डीडीपुरम, बड़ा बाजार, साहूकारा, मढ़ीनाथ, सुभाषनगर, किला और पवन विहार समेत 50 से अधिक वार्डों में उत्पाती बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि लोगों का घरों से बाहर निकलना और छतों पर जाना तक दूभर हो गया है। पशु कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह ने बताया कि जल्द ही वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा।