बरेली। रोडवेज का पुराना बस अड्डा अतिक्रमण का अड्डा बनकर रह गया है। यहां दुकानदार बाहर कूलर, पंखे आदि सामान रखकर आधी सड़क घेर लेते हैं। फास्ट फूड और शिकंजी के ठेले कोढ़ में खाज का काम करते हैं। बस अड्डे के दोनों गेट पर दुकानों के बाहर बची हुई जगह को घेरकर ई-रिक्शे खड़े हो जाते हैं। इस वजह से बसों का मुड़ना और बस अड्डे से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। रोडवेज अधिकारियों की ओर से भेजे गए पत्र फाइलों में धूल फांक रहे हैं। नगर निगम यहां के अतिक्रमण पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
रोडवेज अधिकारियों के मुताबिक, सिकलापुर से नावल्टी चौराहे तक अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम को दो बार पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालत यह है कि रोडवेज का स्टाफ दाएं-बाएं खड़ा होकर बसों को निकलवाता है। जाम की स्थिति बनने पर उसे भी रोडवेज कर्मी ही खुलवाते हैं। इससे कार्यालय के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। संवाद
10 मिनट स्टाॅपेज, आधे घंटे में निकल पाती हैं बसें
अधिकारियों के मुताबिक, बस अड्डे पर दूसरे परिक्षेत्र की बसों का 10 मिनट का स्टाॅपेज होता है, पर अतिक्रमण की वजह से उनके बस अड्डे में घुसने और निकलने में ही 30 मिनट लग जाते हैं। इससे यात्री भी परेशान होते हैं और बसें समय पर यात्रा भी पूरी नहीं कर पातीं। चालक-परिचालक कई बार इसकी शिकायत भी कर चुके हैं।
चालकों-परिचालकों से झगड़ते हैं कब्जेदार
अतिक्रमण की वजह से बस को मोड़ने में काफी दिक्कत होती है। टोकने पर ई-रिक्शा चालक और कब्जेदार झगड़ने लगते हैं। - कैलाश, चालक
अतिक्रमण की वजह से सड़क पर जाम लग जाता है, लेकिन अतिक्रमण नहीं हटवाया जा रहा है। कई बार इसकी शिकायत भी की है। - मनजीत मौर्य, चालक
बस से उतरकर जाम खुलवाना पड़ता है। तब बस आगे बढ़ती है। खड़े वाहनाें को किनारे करने पर कई बार वाहन चालक नाराज हो जाते हैं। - महमूद, परिचालक
नगर निगम को दो बार पत्र भेजा जा चुका है, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब नगर निगम अधिकारियों को फिर पत्र भेजेंगे। साथ ही, मुलाकात कर अतिक्रमण हटाने के लिए कहेंगे। - संजीव श्रीवास्तव, एआरएम बरेली डिपो