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हर अधिकार से वंचित स्त्री की व्यथा है ‘अपराजिता’

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नाटक का मंचन करते कलाकार। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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विंडरमेयर में राज्य नाट्य समारोह का तीसरा दिन
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अर्चना ने 20 किरदार निभाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी
बरेली। बंगला कृति के हिंदी रुपांतरण ‘अपराजिता’ का विंडरमेयर में बुधवार को मंचन किया गया। इसमें एक परित्यक्त स्त्री के जीवन की त्रासदी को उभारा गया है।
उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी की ओर से दया दृष्टि चैरिटेबल ट्रस्ट के संयोजन में चल रहे राज्य नाट्य समरोह का बुधवार को तीसरा दिन था। इसमें परितोष प्रसाद भट्टाचार्य के निर्देशन में मंचित नाटक अपराजिता में अर्चना शर्मा ने 20 किरदार निभाकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। दरअसल, इस नाटक की कहानी एक ऐसी स्त्री के इर्दगिर्द घूमती है, जिसे सारा जीवन हर रिश्ते, हर जगह और हर अधिकार से वंचित किया जाता है। पहले तो शादी करके उसे उसके ही घर से हटाया जाता है, फिर ससुराल से हटाया जाता है और जब मायके लौटती है तो वहां से भी हटाया जाता है। आखिरकार उसे वेश्यावृत्ति के अंधेरे कुएं में धकेल दिया जाता है। उसके जीवन के इसी संघर्ष को इस नाटक के माध्यम से दर्शाया जाता है।
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अंत में अकादमी की नाट्य सर्वेक्षक शैलजा कांत ने निर्देशक परितोश प्रसाद को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस मौके पर साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी, दया दृष्टि ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. बृजेश्वर सिंह आदि मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी मुशाहिद रफत ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रयागराज की कोलाज कल्चरल सोसाइटी का नाटक ‘मृच्छकटिकम’ का मंचन शाम 5:30 से किया जाएगा।
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