शिक्षक भी पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं, ज्यादातर बच्चों के पास नहीं हैं मोबाइल
बरेेली। कोरोना संक्रमण की वजह से बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई होनी थी, लेकिन हालात ये हैं कि इसके लिए न तो शिक्षक गंभीर हैं और न ही ज्यादातर बच्चों के पास मोबाइल फोन हैं। ऐसे में 10 फीसदी बच्चे भी ऑनलाइन पढ़ाई में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इससे उनका कोर्स लगातार पिछड़ता जा रहा है।
शासन ने कोरोना काल में स्कूल बंद रहने पर बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए ऑनलाइन पढ़ाई कराने के निर्देश दिए थे। इसके लिए गूगल मीट का भी सहारा लेने को कहा था, लेकिन परिषदीय स्कूलों के शिक्षक इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। दिक्कत यह भी है कि इन स्कूूलों में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसकी वजह से न तो उनके पास मोबाइल उपलब्ध हैं और न ही वे इंटरनेट का खर्च वहन करने की स्थिति में हैं। मंगलवार को अमर उजाला की टीम जब पीलीभीत रोड पर छोटी बिहार के प्राथमिक स्कूल में पहुंची तो वहां ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था ठीक नहीं मिली। कार्यवाहक हेडमास्टर प्रियंका यादव ने बताया कि स्कूल में 89 बच्चे पंजीकृत है लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई में काफी कम बच्चे ही रहते हैं। लिहाजा व्हाट्सएप पर बच्चों को होमवर्क दिया जाता है। कक्षा पांच के छात्र विनय ने बताया कि मोबाइल ज्यादातर घर के दूसरे लोगों के पास रहता है, इसलिए पढ़ाई करना मुश्किल हो रहा है।
तीन बच्चे हैं। सभी की ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। दिक्कत यह है कि सभी को कैसे अलग-अलग मोबाइल दिलाए जाएं। घर की माली हालत इतनी अच्छी नहीं है। - सुशीला, छोटी बिहार
-ऑनलाइन पढ़ाई सही से नहीं हो पाती है। बच्चे घर में ही किसी तरह थोड़ी बहुत पढ़ाई कर लें, इतना ही बहुत है। सभी को मोबाइल खरीदना भी संभव नहीं है। - केतकी, छोटी बिहार
ऑनलाइन पढ़ाई न कराने वाले शिक्षकों की बनाई जा रही सूची
सभी शिक्षकों को ऑनलाइन पढ़ाई कराना अनिवार्य है, लेकिन तमाम स्कूलों की शिकायत है कि वहां ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो रही है। इसकी जांच कराकर ऑनलाइन पढ़ाई न करने वालों की सूची तैयार कराई जा रही है। - विनय कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी