आठ दिसंबर को थाना बहेड़ी में दर्ज हुई थी रिपोर्ट, मगर नहीं ढूंढ सकी पुलिस
पोस्टमार्टम में 21 दिन पहले बताई मौत, कारण स्पष्ट न होने से विसरा सुरक्षित
बहेड़ी। मंडनपुर गांव के 15 वर्षीय फरीक अहमद की हत्या अपहरण के बाद ही कर दी गई थी। पोस्टमार्टम में 21 दिन पहले उनकी मौत होने की बात सामने आई है। हालांकि मौत का कारण स्पष्ट नहीं होने के चलते विसरा सुरक्षित किया गया है। अपहरण के मुकदमे में भी पुलिस ने हत्या की धारा बढ़ा दी है।
मंडनपुर गांव के फरीक अहमद का शव मंगलवार शाम गन्ने के खेत में दबा हुआ मिला था। पुराना होने के चलते शव गल चुका था। दोनों पैर और एक हाथ जमीन से बाहर निकले होने के चलते जंगली जानवर उन्हें नोंच रहे थे, जिससे इसका खुलासा हुआ। बुधवार को फरीक अहमद के शव का पोस्टमार्टम कराया गया लेकिन वह मिट्टी में दबा होने के चलते पूरी तरह से गल चुका था और सिर्फ कंकाल ही बचा था। इस वजह से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। हालांकि उसका विसरा सुरक्षित किया गया है। पुलिस ने अपहरण के मुकदमे में हत्या की धारा भी बढ़ा दी है। देर शाम फरीक अहमद का शव गांव पहुंचा तो वहां भीड़ जुट गई। गमगीन माहौल में शव को सुपुर्दे खाक किया गया।
घटना के खुलासे को लेकर हो रही पूछताछ
इस घटना के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच के साथ ही सर्विलांस और साइबर टीम को भी लगाया है। फरीक के भाई मोहम्मद अहमद ने इस घटना को लेकर किसी पर शक नहीं जताया है और रंजिश होने से भी इनकार किया है। इस वजह से पुलिस उनके करीबियों से ही पूछताछ कर घटना का कारण तलाशने का प्रयास कर रही है।
21 दिन में भी नहीं खोज सकी पुलिस
फरीक अहमद की हत्या से बहेड़ी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। परिवार वालों का कहना है कि आठ दिसंबर को उसके लापता होने के बाद ही उन लोगों ने रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। वे लोग खुद भी उसे ढूंढ रहे थे लेकिन इतने दिन बीतने के बाद भी पुलिस कुछ पता नहीं कर सकी और उसकी हत्या हो गई।
अंतिम कॉल डिटेल परिजन के साथ
इंस्पेक्टर बहेड़ी ओमप्रकाश गौतम ने बताया कि मृतक का मोबाइल घर में ही था। उसकी कॉल डिटेल निकलवाई गई तो अंतिम बातचीत परिजन के साथ ही मिली है। साथ ही परिजन ने किसी से कोई विवाद या दुश्मनी होने से इनकार किया है। फिलहाल हर बिंदु पर गहराई से जांच की जा रही है।