पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हैंड राइटिंग मिलान ने उलझाया
घटना के बाद पुलिस को कमरे में एक सुसाइड नोट मिला था। इसमें परेशान होकर खुद ही जीवन समाप्त करने की बात कही गई थी। पूर्व विवेचक इंस्पेक्टर अभिषेक सिंह ने जांच में पाया कि बेटी की शादी व बेटे की बीमारी के लिए महेश ने कर्ज लिया था। पुलिस ने यह पत्र फोरेंसिक लैब भेजा। परिवार व स्टाफ से लेकर महेश चंद्र के हस्तलिखित दूसरे कागजात भी भेजे गए। पुलिस के मुताबिक लैब से रिपोर्ट मिली कि सुसाइड नोट महेश ने ही लिखा है। पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान लेती पर तीन डॉक्टरों के पैनल की रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की पुष्टि और फिर शव जलाने का जिक्र था।
इन सवालों के नहीं मिल रहे जवाब
- हत्या की गई तो सुसाइड नोट में महेश की हैंड राइटिंग क्यों? क्या मारने से पहले उनसे लिखवाया गया?
- सुबह करीब नौ बजे महेश के अस्पताल में घुसने के कुछ मिनट बाद ही सीसीटीवी कैमरे बंद क्यों हो गए?
- परिसर में शव जला मगर आसपास के कमरों में बैठे लोगों को आखिर पता क्यों नहीं चला?