बरेली। महिला चिकित्सालय के बाद जिला अस्पताल में भी एचआईवी कन्फर्मेटरी टेस्ट किट खत्म होने की कगार पर है। लिहाजा, गर्भवतियों की जांच के साथ ही मरीजों की सर्जरी पर भी संकट मंडराने लगा है। इसकी स्थानीय खरीद भी नहीं कर सकते। नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) की ओर से ही इसकी आपूर्ति की जाती है।
एचआईवी नियंत्रण के लिए सर्जरी से पहले मरीजों और गर्भावस्था के दौरान गर्भवतियों की रैपिड टेस्ट किट से जांच की जाती है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर संबंधित मरीज की दोबारा एचआईवी कन्फर्मेटरी टेस्ट किट से जांच होती है। इसकी रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिलने पर मरीज में एचआईवी की पुष्टि हो जाती है। अधिकारियों के मुुताबिक, रैपिड टेस्ट किट उपलब्ध है, पर कन्फर्मेटरी किट का संकट प्रदेश के सभी जिलों में है।
महिला चिकित्सालय में संबंधित किट खत्म हो गई है। जिला अस्पताल में कुछ ही किट शेष हैं। इनका इस्तेमाल सर्जरी से पूर्व मरीजों की जांच में किया जा रहा है। नई किट की आपूर्ति फिलहाल नहीं हुई है।
स्वास्थ्य केंद्रों व निजी अस्पतालों से भी पहुंचते हैं संदिग्ध
एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) संचालक मनोज कुमार के मुताबिक, महिला चिकित्सालय में किट खत्म होने से गर्भवतियों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। वहीं, शासनादेश के तहत रैपिड किट से निजी अस्पताल या पैथोलॉजी में भी जांच के दौरान अगर रिपोर्ट पॉजिटिव मिलती है तो अधिकृत पुष्टि के लिए मरीज को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। इसलिए यहां ज्यादा कन्फर्मेटरी टेस्ट किट की जरूरत होती है। ब्यूरो
नाको से आपूर्ति न होने की वजह से एचआईवी कन्फर्मेटरी टेस्ट किट की कमी पूरे प्रदेश में है। मुख्यालय से जल्द किट आपूर्ति की जानकारी मिली है। - डॉ. अलका शर्मा, एडी एसआईसी, जिला अस्पताल