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बरेली मंडल में धान का उत्पादन आधा कर सकता है गंधी कीट

सार

  • पीलीभीत-शाहजहांपुर और बरेली के सर्वाधिक उत्पादन वाले इलाकों में हमला
  • आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट, समय रहते बचाव करना जरूरी
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धान की फसल का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली। धान की फसल पर इस बार गंधी कीट का खतरा मंडरा रहा है। केंद्रीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान यानी आईवीआरआई के वैज्ञानिकों ने किसानों को आगाह किया है कि समय रहते इस कीट से बचाव का इंतजाम न करने पर वह 50 फीसदी से ज्यादा फसल तबाह कर सकता है। बरेली मंडल में इस कीट का प्रकोप भी उन इलाकों में ज्यादा है जहां धान का सर्वाधिक उत्पादन होता है। इससे धान का उत्पादन भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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आईवीआरआई के वैज्ञानिकों के मुताबिक गंधी कीट के साथ फफूंदी रोग बड़े पैमाने पर धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। यह कीट धान पर उस समय हमला करता है जब उसमें बाली निकलनी शुरू होती है। बाली में दाने बनने से पहले दूध बनता है जिसे यह कीट चूस लेता है। इससे बाली में दाना नहीं बन पाता और ऊपर से देखने पर बाली भूरी-भूरी दिखाई देने लगती है।
आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह ने बताया कि गंधी कीट रस चूसने वाले कीट के ग्रुप में आता है और तब ज्यादा आक्रामक होता है जब मौसम में गर्मी ज्यादा होने के साथ नमी कम हो जाती है। खासतौर पर रात का तापमान 25 डिग्री के आसपास या ज्यादा रहने पर गंधी कीट का प्रकोप तेजी से फैलता है। चूंकि इस साल बारिश कम हुई है लिहाजा हरियाली कम होने के कारण गंधी कीट धान की फसल को निशाना बना रहा है। एक बार कीटनाशक का स्प्रे करने के बाद भी एक हफ्ते तक ही उसका असर रहता है, उसके बाद बगल के खेतों से यह कीट दोबारा धान को नष्ट करने लगता है।
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डॉ. सिंह के मुताबिक गंधी कीट से बचाव के लिए अपनी फसल में उपचार करने के साथ पड़ोस के खेतों में भी उपचार कराना जरूरी है। खेत में इस कीट के कारण एक विशेष गंध निकलती है, इसी कारण इसे गंधी कीट कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस समय गंधी कीट बरेली में नवाबगंज, दमखोदा, शेरगढ़, बहेड़ी, पीलीभीत के पूरनपुर, ललौलीखेड़ा, माधोटांडा, शाहजहांपुर के बंडा, पुवायां आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहा है।

मकड़ी बचा सकती है इस कीट से

इस कीट पर नियंत्रण के लिए खेत और मेड़ों से खरपतवारों को निकालना जरूरी है। किसी भी रासायनिक दवा के छिड़काव से पहले खेत में नमी रखनी चाहिए। जैविक नियंत्रण में खेत में मकड़ियों का संरक्षण बहुत लाभकारी होता है। जब फसल 45 दिन की हो, उस समय ज्वार-बाजरा या मक्का के सूखे हुए तनों को इकट्ठा करके एक फुट आकार के बंडल बनाकर खेत में जगह-जगह लगा देना चाहिए ताकि मकड़ियां अपनी संख्या में वृद्धि कर सकें। रासायनिक नियंत्रण में मेलाथियान पांच प्रतिशत आठ किलो प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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