खानकाह नियाजिया में हाजिरी देने आए तबला वादक आदित्य कल्याणपुर
बरेली। कई साल पहले आपने चाय के एक विज्ञापन में उस्ताद अल्लाह रक्खा खां और उस्ताद जाकिर हुसैन खां के साथ एक छोटे से शागिर्द को तबला बजाते देखा होगा। यह विज्ञापन वाह ताज.. के नाम से मशहूर हुआ था। वह छोटा शागिर्द अब उस्तादों की श्रेणी में खड़ा है। उसके तबले की गूंज भारत से लेकर विदेशों तक में सुनी जा रही है। हम बात कर रहे हैं प्रख्यात तबला वादक आदित्य कल्याणपुर की। मंगलवार को खानकाह नियाजिया में उन्होंने ऐसा समा बांधा कि हर कोई वाह उस्ताद वाह कह उठा।
खानकाह में सुकून और सादगी भरे माहौल के बीच आदित्य कल्याणपुर ने अपने तबले का हुनर सज्जादानशीन अलहाज शाह मेहंदी मियां के सामने हाजिरी देते हुए पेश किया। खानकाह के बुजुर्ग शब्बू मियां सहित तमाम खानवादे भी मौजूद थे। आदित्य की उंगलियां तबले पर थिरकीं तो देखते ही देखते मुरीदों का मजमा इकट्ठा हो गया। उन्होंने अपनी पेशकश के दौरान कई शानदार और सीधे दिल पर असर करने वाली शास्त्रीय धुनें पेश कीं। इसमें खासतौर से संगीत के छह घरानों की अलग-अलग बंदिशें तीन ताल में पेश कर समा बांध दिया।
तबले पर थिरकतीं उनकी उंगलियां और पेशकश का अंदाज बार-बार उस्ताद जाकिर हुसैन की याद दिला रहा था। इन्हीं बंदिशों के बीच उन्होंने कायदे, टुकडे़ और रेले का भी बहुत खूबसूरत ढंग से समावेश किया। इस पर सुनने वाले मंत्रमुग्ध हो गए। इससे पहले यहां पहुंचने पर उन्होंने खानकाह के बुजुर्ग एवं मोहतमिम शाह सिबतैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। आखिर में साहिबे सज्जादा मेहंदी मियां से दुआएं लेकर वह दिल्ली के लिए रवाना हो गए।