बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग के शोधार्थियों ने मधुमेह के इलाज की दिशा में बड़ी सफलता पाई है। गोट वीड और मेथी का उपयोग मधुमेह के खिलाफ कारगर साबित हो सकता है। यह शोध फॉमेसी विभाग के शिक्षक डॉ. शशिभूषण तिवारी और प्रशांत कुमार ने किया है। प्री-क्लिनिकल शोध के दौरान डायबिटीज से पीड़ित चूहों पर इसका बेहद सकारात्मक परिणाम देखा गया है।
डॉ. शशिभूषण के अनुसार, रुहेलखंड क्षेत्र में गोट वीड और मेथी का पौधा आसानी से मिल जाता है। इन पौधों का आधुनिक तकनीक से विश्लेषण किया गया तो तीन यौगिक सामने आए। इसमें से एक तत्व स्कुटेलारिन को मधुमेह के कई लक्ष्यों पर एक साथ वार करने में सबसे असरदार पाया गया है। गोटवीड, इंसुलिन और ग्लूकोज कंट्रोल करने में प्रभावी है। गोट वीड शरीर में इंसुलिन सिग्नलिंग और ग्लूकोज के मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है। यह शरीर में तनाव को कम करने और सूजन पैदा करने वाले रास्तों को रोकता है।
शोधार्थी प्रशांत ने बताया कि मेथी के पत्तों और बीजों में भरपूर मात्रा में फाइबर, फेनुग्रीकिन, विटामिंस (ए, सी, डी व बी-1) और कैल्शियम, आयरन, जिंक जैसे खनिज पाए जाते हैं। इसके बीज रक्त शर्करा (ब्लड शुगर), फैट और कोलेस्ट्रॉल को तेजी से नियंत्रित करने में मददगार हैं। मेथी में एंटी-बैक्टीरियल और कैंसर से लड़ने वाले गुण भी मौजूद हैं। इन पौधों में मौजूद प्राकृतिक तत्व इंसुलिन प्रणाली को मजबूत करते हैं। भविष्य में मधुमेह के मरीजों के लिए दवाइयां तैयार करने में यह शोध एक मजबूत आधार बनेगा।