ऊंट की हड्डियों को जोड़ते वैज्ञानिक और कर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी के निर्देश पर पोस्टमार्टम के लिए शव आईवीआरआई लाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव को पशुपालक दफनाते या जला देते, जबकि इसके कंकाल का अध्ययन कर कई जानकारियां हासिल की जा सकती थीं। इसलिए पशुपालक से शवदान का अनुरोध किया गया। स्वीकृत के बाद विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी कर अब कंकाल विभाग में स्थापित हुआ। आगामी सत्र से बीवीएससी, एमवीएससी, पीएचडी के लिए देश-विदेश से प्रवेशित विद्यार्थियों को ऊंट की शारीरिक संरचना के बारे में अध्ययन का मौका मिलेगा।