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यूपी: तीन तलाक बिल पर छात्राएं बोलीं-  मोदी जी थैंक्स

Thu, 01 Aug 2019 02:24 PM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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तीन तलाक (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास होने के बाद उलमा भले ही मुस्लिम महिलाओं से शरीयत पर बने रहने की अपील करते नजर आ रहे हैं, लेकिन महिलाओं की प्रतिक्रिया से साफ जाहिर है कि शरीयत के नाम पर वे तीन तलाक का दर्द झेलने को अब और तैयार नहीं हैं। मुस्लिम युवतियों में तीन तलाक बिल पास होने के बाद खुशी की लहर है। अमर उजाला ने उनसे बात की तो ज्यादातर छात्राएं और युवतियां तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा करती नजर आईं।

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अल्लाह कुरान में कहता है कि जब कोई शौहर अपनी बीवी को तलाक बोलता है तो जमीन और आसमान हिल जाता है। शरीयत में तीन तलाक पहले ही मना था जिसे कुछ मुसलमान नहीं मान रहे थे, लेकिन मोदी को कोटि कोटि धन्यवाद जिन्होंने मुसलमानों को उनकी शरीयत की याद दिलाकर कानूनन उन्हें शरीयत पर लौटने के लिए बाध्य कर दिया- नाजमीन, छात्रा  

तीन तलाक बिल पास होने से सभी मुस्लिम बहनों की तरफ से मोदी जी का बहुत शुक्रिया। हमें उम्मीद है कि यह कानून के बन जाने के बाद मर्दों को सजा का डर होगा और इससे तीन तलाक हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। बिल पास होना महिलाओं के लिए बड़ी राहत है। वे अब सम्मान के साथ जी सकेंगी- शीरीन खान, छात्रा 
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तीन तलाक बिल का पारित होना मुस्लिम महिलाओं के सम्मान की जीत है। नरेंद्र मोदी की दृढ़ निश्चय वाली सरकार का आभार व्यक्त करती हूं कि उन्होंने मुस्लिम समाज को तीन तलाक जैसी कुरीति से निजात दिलवाई। इससे तीन तलाक के नाम पर महिलाओं पर हो रहे अत्याचार से मुक्ति मिलेगी- नगमा फरहत, यूनिसेफ वर्कर  

'तरक्कीपसंद मुसलमान मानेंगे मोदी जी का अहसान'

लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पारित कराकर मुस्लिम समाज से किया अपना वादा निभा दिया। इसके लिए सिर्फ मुस्लिम महिलाएं ही नहीं बल्कि हिंदुस्तान का हर तरक्कीपसंद मुसलमान भाजपा और मोदी का अहसानमंद रहेगा।

तीन तलाक पर बिल पास होने के दिन को मुस्लिम समाज के लिए सुनहरा दिन मानती हूं और मोदी जी की कोशिशों के लिए मुबारकबाद देती हूं जिन्होंने अपनी हिकमत से तीन तलाक बिल को अमली जामा पहनाया। यह बिल भविष्य में आने वाली नस्लों के लिए बदलाव की बुनियाद बनेगा। एक महिला के मजबूत होने का मतलब पूरे खानदान का मजबूत होना है। जो सियासी तंजीमें इस बिल का विरोध कर रही थीं, इसके पीछे उनकी अपने वोट बैंक की राजनीति थी- डॉ. नाजिया आलम, भाजपा नेता

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कानून से भय तो बनेगा, मगर अभी कुछ सुधार की जरूरत

तीन तलाक पर कानून से भय तो बनेगा। यह भी उम्मीद है कि इससे तीन तलाक में कमी भी आएगी, मगर अभी काफी सुधार की जरूरत है। शौहर को सजा का प्रावधान बनाया गया, मगर महिला और यदि बच्चे हुए तो उनके भरण पोषण की व्यवस्था कैसे होगी। इस पर भी सरकार को गौर करना चाहिए। 

तीन तलाक पर कानून पारित किया गया वह भी कमजोरी के साथ। इस नए कानून में महिलाओं के लिए कोई मजबूती नहीं दिखती। यह कानून तब मजबूत माना जाता जब तलाक पीड़ित महिलाओं के जीवन की खुशहाली के बारे में भी सोचा जाता। इसमें महिलाओं के भविष्य का कहीं भी ख्याल नहीं रखा गया है। आने वाले वक्त में इस कानून का महिला के हक के लिए कम और दुरुपयोग की ज्यादा संभावना है- इमालदा परवीन, समाजिक कार्यकर्ता

एक जुर्म की रोकथाम के लिए मजबूत कानून बनना चाहिए मगर दुष्प्रभाव का भी ख्याल रखना जरूरी है। तीन तलाक में ऐसा ही हुआ है इसमें पीड़ित महिलाओं के कल्याण का ध्यान नहीं रखा गया। तीन तलाक का जो शरई तरीका है उसमें कोई कमी नहीं है, परंतु चंद लोग जब शरीयत से हटकर तलाक देते हैं तो नया कानून उनको तीन साल के लिए जेल की सजा देगा, लेकिन महिलाओं के मेंटिनेंस की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे पीड़िता को कोई फायदा नहीं होगा। इसके अलावा घरों में सुलह की गुंजाइश भी खत्म होगी- रूबी खान, सामाजिक कार्यकर्ता

तीन तलाक के कानून में सजा तो नजर आती है मगर सहायता नजरअंदाज है। इसमें पहले तलाक का दंश झेलने वाली महिलाओं को सहायता की भी जरूरत है। मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी रखकर यह कानून बनाया गया है तो उनके हक भी बात इस कानून में होना चाहिए। मेरा मानना है कि पीड़ित महिला को सरकारी नौकरी और उसके बच्चे हैं तो उनके लिए निशुल्क की व्यवस्था भी होनी चाहिए। शरई कानून की व्यवस्था में कोई कमी नहीं परंतु कुछ लोग जब शरीयत से हट जाते हैं तब उन लोगों को मुश्किल का सामना करा पड़ता है- हाजी साकिब रजा खां, व्यवसायी

तीन तलाक बिल पास हुआ, अच्छी बात है मुस्लिम महिलाओं के हक के बारे में सोचा गया। इससे बीवी को तलाक देने वालों में भय भी पैदा होगा। छोटे-छोटे मामले में एक साथ तीन तलाक बोल देना शरई एतबार से भी ठीक नहीं माना गया। चंद लोग गुस्से में आकर ऐसी हरकत कर जाते हैं। इससे बीवी के सामने समस्या खड़ी हो जाती है। इस पर तो रोक लगेगी मगर महिलाओं के सामने पेश आने वाली परेशानी पर गौर नहीं किया गया कि पति के जेल जाने के बाद उसका भरण पोषण कैसे होगा। दूसरी बात इस कानून का दुरुपयोग न हो इसे कैसे रोका जाएगा- पम्मी खान वारसी, अध्यक्ष जन सेवा मंच
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