शहर के राजेंद्र नगर, आवास विकास कॉलोनी, गुप्ता चौराहा, डीडीपुरम, ग्रीन पार्क कॉलोनी, कालीबाड़ी, पवन बिहार समेत अन्य पॉश इलाकों में कुत्तों का आतंक है। रात के समय ये कुत्ते वाहन सवारों को दौड़ा लेते हैं।
बरेली में लावारिस कुत्ते खूंखार हो रहे हैं। एक साल में 21 हजार 863 लोगों को काटकर घायल किया। इसमें 11 लोगों की मौत भी हो चुकी है। शहर की पॉश कॉलोनियों और मोहल्लों में भी हर माह पांच सौ से अधिक लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। देहात क्षेत्र में पशुओं पर कुत्तों के हमले बढ़ रहे हैं। नगर निगम की ओर से चलाया जाने वाला अभियान महज खानापूरी तक सिमट कर रह जाता है।
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सीबीगंज में एक मार्च को कुत्तों के झुंड ने एक बच्ची पर हमला कर दिया था। घायल बच्ची की मौत हो गई थी। छह माह में सिर्फ सीबीगंज में ही छह बच्चों पर कुत्तों ने जानलेवा हमला किया। इसमें दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
शहर के राजेंद्र नगर, आवास विकास कॉलोनी, गुप्ता चौराहा, डीडीपुरम, ग्रीन पार्क कॉलोनी, कालीबाड़ी, पवन बिहार समेत अन्य पॉश इलाकों में कुत्तों का आतंक है। रात के समय ये कुत्ते वाहन सवारों को दौड़ा लेते हैं। कई बार दोपहिया सवार गिरकर भी चोटिल हो जाते हैं।
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शहर में 15 हजार कुत्ते, 1750 पकड़े गए
नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 15 हजार से अधिक लावारिस कुत्ते हैं। 2022 में अलग-अलग महीनों में अभियान चलाकर 1750 कुत्तों को पकड़ा गया। इन सभी का बधियाकरण करवा दिया गया। सीवीओ आदित्य तिवारी ने बताया कि इस साल भी करीब चार सौ से अधिक कुत्तों को पकड़ा जा चुका है। जो भी कुत्ते पकड़े जाते हैं, उन सभी का बधियाकरण करवा दिया जाता है।
वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 70 लोग
लावारिस कुत्तों के काटने से रोज औसतन 70 लोग एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। एक महीने में यह आंकड़ा करीब दो हजार से भी अधिक पहुंच जाता है। बिल्ली और बंदर के काटने के आंकड़े अलग हैं।
इसी महीने से तेज करेंगे अभियान
सीवीओ ने बताया कि कुत्तों के पकड़ने का ठेका दिया जा चुका है। शहर के किसी भी मोहल्ले या कॉलोनी से शिकायत आती है तो वहां टीम भेजकर कार्रवाई कराई जाती है। इसी महीने से सभी मुख्य सड़कों पर और कॉलोनियों में अभियान चलाकर इन्हें पकड़ा जाएगा।
रात में बढ़ जाता है आतंक
आवास विकास कॉलोनी की कमला देवी ने कहा कि कुत्तों का आतंक रात के समय बहुत बढ़ जाता है। बच्चों को तो छोड़िए, बड़ों को भी ये दौड़ा लेते हैं। इन्हें पकड़ा जाना चाहिए। गुप्ता चौराहा के अमित शर्मा ने कहा कि लावारिस कुत्तों को तो पकड़ा ही जाना चाहिए। पालतू कुत्तों की भी निगरानी हो और नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए।
गलियों में बैठा रहता है झुंड
राजेंद्र नगर निवासी रेखा नागरानी ने कहा कि पार्कों और गलियों में कुत्तों के झुंड बैठे रहते हैं। ये देखते ही लोगों को दौड़ा लेते हैं। बच्चों पर कई बार हमले कर चुके हैं। चंद्रलोक कॉलोनी के गौरव कुमार ने कहा कि कुत्तों के हमले से बचने के लिए कई बार दोपहिया सवार गिरकर चोटिल हो जाते हैं। इनको पकड़ने के लिए अभियान चलना चाहिए।