ट्रांसपोर्ट नगर के प्लाट आवंटन में बीडीए के अधिकारियों ने बड़ा खेल कर दिया। ट्रांसपोर्टरों को प्लाट मिलने चाहिए थेे, लेकिन बिल्डर, व्यापारी और अफसरों के रिश्तेदारों को बीस फीसदी से ज्यादा प्लाट आवंटित कर दिेए गए। लाटरी सिस्टम में शामिल होने के बाद भी ट्रांसपोर्ट मुंह देखते रह गए। टीपी नगर के बसने में अड़चनें आने की सबसे बड़ी वजह भी यही है। अपात्रों के पास प्लाट पहुंचने से टीपीनगर बसने के बजाए वहां दलालों का खेल चल रहा है। आसपास के गांव के कई लोग टीपीनगर में प्लाट बेचने को दलाली कर रहे हैं।
आवंटियों में मुरादाबाद, मेरठ, लखनऊ आदि शहरों के लोग भी शामिल हैं। बाहर के ज्यादातर आवंटी या तो अफसरों के रिश्तेदार हैं या व्यापारियों के। प्लाट ट्रांसपोर्टरों के हाथों में पहुंच गए होते जाने कब का टीपीनगर बस जाता।
बीडीए ने वादा नहीं निभाया
शाहजहांपुर रोड पर 24.89 हैक्टेयर इलाके में ट्रांसपोर्ट नगर योजना विकसित करने को किसानों से भूमि क्रय की गई। 1996-97 में इस योजना की शुरूआत करके 2001 में प्लाटों का आवंटन किया गया। इस योजना में ट्रांसपोटरों के लिए 1074 प्लाट, 12 दुकानों के अलावा पेट्रोल पंप, होटल, ढाबा, धर्मकांटा, डिस्पेंसरी, बिजनेस सेंटर, सर्विस सेंटर, फायर स्टेशन, पुलिस स्टेशन, कम्यूनिटी हाल, आरटीओ कार्यालय का निर्माण होना था, लेकिन बीडीए ने अपना वादा नहीं निभाया।
सर्किल रेट भी मुसीबत बना है
टीपी नगर के आवंटियों के लिए सर्किल रेट भी मुसीबत बना हुआ है। इस इलाके का सर्किल रेट 35 हजार रुपये है। जबकि बीडीए 11830 रुपये के हिसाब से जमीन बेच रहा है। बैनामा कराने के समय सर्किल रेट के हिसाब से ही स्टांप लगता है। इसलिए प्लाट मंहगा पड़ता है।
केस-वन
टीपीनगर के ए ब्लाक में जाकिर मिस्त्री की दुकान के सामने संभागीय परिवहन अधिकारी के रिश्तेदार का प्लाट है। सस्ते दामों में उसने उस समय प्लाट आवंटित करा लिया। अब वह उसकी मोटी रकम मांग रहे हैं।
केस-दो
सीबीगंज के गोविंदापुर गांव में रहने वाले अली रजा विदेश में नौकरी करते हैं। उनका ट्रांसपोर्ट के काम से कोई लेना-देना नहीं है। उनके पास भी टीपी नगर में प्लाट है। वह प्लाट बेचने के लिए दलालों के संपर्क में हैं।
केस-तीन
बारसी मोटर्स वर्क्स के मालिक डीजल पंप मैकेनिक शहाबुद्दीन ने री सेल में मजबूरी में एक प्रॉपर्टी डीलर से प्लाट खरीदा है। वजह यह रही कि लाटरी सिस्टम में उनका नंबर ही नहीं आया। बाहर के लोगों को लाटरी सिस्टम में शामिल करने से यह दिक्कत हुई।
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हम कई बार बीडीए को मैकेनिकों की सूची सौंप चुके हैं। एक महीना पहले ही 243 मैकेनिकों की सूची बीडीए के अफसरों को दी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई ही नहीं की। बीडीए मैकेनिकों की सूची का सत्यापन कराकर आवंटन की प्रक्रिया शुरू कराए- शोभित सक्सेना, अध्यक्ष, दि बरेली ट्रक ओनर्स ट्रांसपोटर्स डम्प डीलर्स वेलफेयर एसोसिएशन, बरेली
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-मैकेनिकों में ज्यादातर कम पूंजी वाले लोग हैं। कुछ लोग एक मुश्त रकम देकर भी प्लाट खरीदना चाहते हैं। जो जिस तरह से लेना चाहे उसे आसानी से प्लाट मिलेगा तो सब लेने को तैयार हैं, लेकिन 97 प्लाटों के काम नहीं चलेगा। बीडीए को कम से कम 300 प्लाटों की व्यवस्था करनी होगी- सैयद हसनैन अली, मैकेनिक
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मेरे पास छह ट्रक हैं, टीपी नगर में प्लाट लेने के लिए लाटरी सिस्टम में हिस्सा लिया था, लेकिन बीडीए ने उसमें अपात्रों को शामिल कर लिया। इसकी वजह से उन्हें प्लाट नहीं मिल पाया। इस मामले की जांच होनी चाहिए- सल्लन भाई, ट्रांसपोर्टर, निवासी ग्राम भिडौंलिया
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हमारी 15 ट्रक चलते हैं। टीपी नगर में प्लाट लेने के लिए पहले ही दिन से कोशिश कर रहे हैं। आवंटन के समय लाटरी सिस्टम में शामिल होने के बाद भी प्लाट नहीं मिल पाया। अब अपात्र लोग प्लाटों की मोटी रकम मांग रहे हैं-अशफाक हुसैन खां, ट्रांसपोर्टर, निवासी ठिरिया निजावत खां