फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिस की पाठशाला: 18 वर्ष से कम आयु वाले विद्यार्थी सोशल मीडिया से रहें दूर, इन बातों का रखें ध्यान

Wed, 01 May 2024 11:31 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में मंगलवार को अमर उजाला की ओर से पुलिस की पाठशाला का आयोजन हुआ। जिसमें एसपी दक्षिणी मानुष पारीक ने छात्रों को साइबर अपराधों के प्रति आगाह किया। छात्रों को तमाम जानकारियां भी दीं। 
विज्ञापन
पुलिस की पाठशाला में जानकारी देते एसपी साउथ मानुष पारीक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विद्यार्थियों को 18 साल की उम्र तक सोशल मीडिया से दूर रहना चाहिए। अभिभावकों को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि आजकल नए-नए तरीक के साइबर अपराध हो रहे हैं। जरा सी चूक से आप धोखा खाकर किसी साजिश के शिकार हो सकते हैं। फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर, डीप फेक व कस्टमर केयर सर्विस के नाम पर फ्रॉड करके लोगों को ठगा जा रहा है। जूस जैकिंग के जरिए भी मोबाइल हैक करके आपका गोपनीय डेटा चुराया जा रहा है। 

विज्ञापन


साइबर अपराध से सचेत रहने के लिए ये बातें अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पुलिस की पाठशाला में मुख्य अतिथि एसपी दक्षिण मानुष पारीक ने कहीं। जूस जैकिंग के बारे में उन्होंने बताया कि रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, होटल या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर यूएसबी केबल से मोबाइल चार्ज करने से बचना चाहिए। क्योंकि हैकर सार्वजनिक पोर्ट, एडाप्टर या केबल में मालवेयर लगाकर आपका गोपनीय डाटा चुरा सकते हैं। फोन और लैपटॉप लॉक भी हो सकता है। बचाव के लिए यात्रा करते समय पावर बैंक साथ में रखें। अपने फोन के साथ मिले चार्जर का उपयोग करें। 

व्हाट्सएप की प्राइवेसी सेटिंग बदलें 
आजकल व्हाट्सएप ग्रुप पर बिना अनुमति के कोई भी किसी को जोड़ लेता है। अनावश्यक लिंक, वीडियो व फोटो आते हैं। इससे बचने के लिए प्राइवेसी सेटिंग में बदलाव करें। ताकि ग्रुप में जोड़ने से पहले आपकी अनुमति ली जा सके।

विज्ञापन

लालच और डर से बढ़ रहा अपराध 
मुख्य अतिथि ने कहा कि लालच और डर साइबर अपराध की मुख्य वजह हैं। कम समय में रुपये कमाने के ऑफर देखकर लालच में लोग विज्ञापन और लिंक पर क्लिक कर देते हैं, जो कि नहीं करना चाहिए। क्योंकि फोन में एक्सेस मिलने पर अपराधी दुरुपयोग करके खाता खाली कर लेते हैं। 

वहीं अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल न उठाएं। इसके जरिए आपकी फोटो, वीडियो बनाकर उसे एडिट कर जालसाज उसे सार्वजनिक करने का डर दिखाकर उगाही करते हैं। 

पुलिस की पाठशाला में छात्र - फोटो : अमर उजाला
एआई से हो रहा वॉयस क्लोनिंग फ्रॉड 
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल करके भी जालसाजी हो रही है। वीडियो, फोटो के साथ ही आवाज की भी क्लोनिंग की जा रही है। परिजन की आवाज में आपात स्थिति का झांसा देकर रुपये की मांग की जाती है और लोग बिना सोचे-समझे भुगतान कर देते हैं। ऐसे -मामलों में क्रॉस वेरिफाई करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य तौकीर सिद्दीकी व संचालन फरहान अहमद सैफी ने किया। 

छात्रों ने पूछे सवाल
आजकल कम समय में अधिक रुपये देने वाले एप आ गए हैं। ये लालच देते हैं, इनसे कैसे बचा जाए? - समीर
जवाब- सबसे पहले याद रखें कि बिना मेहनत कुछ नहीं मिलेगा। ऐसे एप को डाउनलोड नहीं करें। इनके लिंक पर भी क्लिक करने से बचें।
डीपफेक में वीडियो को परिवर्तित किया जाता है। ऐसा होने पर क्या करें? - अली खान 
जवाब- अगर किसी का असहमति से डीपफेक वीडियो बना है तो पुलिस में शिकायत करें। सोशल साइट पर साझा होने पर उसका लिंक कॉपी करके साइबर शाखा को कार्रवाई के लिए दे सकते हैं।
यूपीएससी की तैयारी करने के लिए क्या करें? - शौर्य राजपूत
जवाब- सकारात्मक सोच के साथ सही दिशा में प्रयास करें। खुद को लगातार अपडेट रखें।
विज्ञापन

सावधानी के लिए इन बातों का रखें ध्यान
  • उपयोग नहीं होने पर उपकरण का इंटरनेट, ब्लूटूथ और वाईफाई बंद रखें।
  • अपना पासवर्ड मजबूत बनाएं, हर महीने बदलते रहें।
  • बच्चों की फोन पर होेने वाली गतिविधियों पर नजर रखें।
  • सोशल मीडिया अकाउंट पर टू स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें