पीलीभीत की संक्रमित महिला के बेटे की भी कोरोना पॉजिटिव पाया जाना स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार बेटा उमरा यात्रा पर जाते वक्त या वहां से लौटते वक्त संक्रमित नहीं हुआ था, बल्कि बाद में अपनी मां के संपर्क में आने से हुआ।
दरअसल, महिला में कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। एहतियात बरतने के लिए बेटे को भी आइसोलेशन में रखा गया था, इसके बावजूद बेटा लगातार मां से मिलता-जुलता रहा। यही नहीं वह मोबाइल फोन से मां की बात बाहर परिचितों से भी कराता रहा।
इसी लापरवाही को बेटे के संक्रमित होने के पीछे अहम वजह माना जा रहा है। हालांकि जिला अस्पताल प्रशासन किसी तरह की लापरवाही से इनकार रहा है। कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है।
चौक बाजार स्थित पुराने अस्पताल परिसर में भी नवनिर्मित सीएमओ कार्यालय में क्वारंटीन वार्ड बना है। स्वास्थ्य विभाग के नियम के अनुसार कोरोना संक्रमित और संदिग्ध मिले व्यक्तियों को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाएगा। विदेश से आने वालों को क्वारंटीन वार्ड में 14 दिन की निगरानी में रखा जाता है।
कोरोना पॉजिटिव मिली अमरिया की महिला को 20 मार्च को आइसोलेशन में लाया गया था। उसका बेटा भी उसी वक्त मां के साथ आइसोलेट हुआ था। महिला के संक्रमण के बाद बेटे का भी सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। बेटे की रिपोर्ट मिलने के बाद लापरवाही के आरोप स्वास्थ्य विभाग पर भी लगे हैं।
अमरिया में महिला के कुछ परिचित और रिश्तेदारों का कहना है कि बेटा आइसोलेशन से मां की अपने फोन से बात कराता था। ऐसे में उनके बीच दूरी सुरक्षा के लिहाज से पूरी नहीं रही। माना जा रहा है कि इसी वजह से वायरस बेटे तक भी पहुंच गया।
जांच रिपोर्ट की बात करें तो उसमें भी यात्रा के दौरान संक्रमण नहीं बताया गया है। बल्कि किसी के संपर्क में आने से बेटे तक वायरस पहुंचने की बात कही गई है। वहीं सीएमएस जिला अस्पताल डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने कहा कि मां और बेटे को अलग-अलग रखा गया है। आइसोलेशन वार्ड में दोनों के संपर्क में आने की बात पूरी तरह से गलत है। इस पर स्वास्थ्य कर्मी लगातार नजर रखते हैं।