बरेली। ये फोरलेन सड़क बनी है या फिर आम पब्लिक के साथ मजाक किया गया। न बिजली के ट्रांसफार्मर शिफ्ट हुए, न पोल। पेड़ भी नहीं काटे गए। डिवाइडर भी पुराना है। आधे अधूरे साइकिल ट्रैक के पत्थर उखड़ने लगे हैं। जितना साइकिल ट्रैक बना है, उस पर मोटर मैकेनिक और आटो चालकों का कब्जा है। फड़ दुकानदार अपने फड़ लगाने लगे हैं। आठ महीने में काम पूरा करने की शर्त निकल गई। पंचायत चुनाव के बाद काम शुरू कराने का बीडीए का दावा भी पुराना हो गया। जिम्मेदार कहते तो हैं कि बनाएंगे लेकिन कब ? वह नहीं बता पाते।
बीडीए की अवस्थापना निधि से जनवरी 2015 में शहामतगंज से सेटेलाइट तक 14 सौ मीटर फोरलेन सड़क और साइकिल ट्रैक का निर्माण स्वीकृत किया गया। एस्टीमेट फोरलेन का बना लेकिन बाद में इसी में नियम साइकिल ट्रैक शामिल हो गया। सड़क निर्माण की लागत 6.5 करोड़ है। इसमें 2.5 करोड़ का साइकिल ट्रैक अलग से है या पुराने एस्टीमेट में शामिल। ये भी स्पष्ट नहीं है। टेंडर शर्तों के अनुसार दोनों काम आठ महीने में पूरे होने थे लेकिन एक साल बीतने बाद भी अधूरे पड़े हैं। पुरानी सड़क पर बजरी और कोलतार चिपकाकर फोरलेन सड़क की खानापूरी हो गई, जो अभी से हिचकोले खाने लगी है। बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर अभी तक शिफ्ट नहीं हुए। डिवाइडर भी पुराना है। आटो चालकों ने आधी से ज्यादा सड़क पर अतिक्रमण कर रखा है। ट्रक, बसें और डीसीएम फोरलेन पर ही खड़े होते हैं। दुकानदार पहले कच्ची जगह में अपना सामान रखते थे। फोरलेन बनने के बाद उनको पक्की सड़क मिल गई। साइकिल ट्रैक बनाने के नाम पर सड़क के किनारे जो कर्व स्टोन लगाए गए, वह बनने से पहले ही उखड़ने लगे हैं। ट्रैक पर साइकिलें तो निकल नहीं सकीं लेकिन अनाधिकृत फड़ या रिक्शे वालों का कब्जा जरूर हो गया। मोटर मैकेनिक साइकिल ट्रैक पर पुराने वाहनों की मरम्मत करते हैं। पंचायत चुनाव के बाद बीडीए ने काम तुरंत पूरा कराने का दावा किया था। सारे दावे हवा हवाई साबित हुए। अब तो यही माना जाने लगा है कि बीडीए ने 6.5 करोड़ में फोरलेन और साइकिल ट्रैक बनाकर शहरवासियों के साथ मजाक किया है।
‘बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर शिफ्ट नहीं होने से सड़क और साइकिल ट्रैक निर्माण नहीं हो पाया। इसके लिए विद्युत विभाग जिम्मेदार है। पोल और ट्रांसफार्मर शिफ्ट होते ही काम शुरू हो जाएगा। फिनीशिंग होते ही सड़क और साइकिल ट्रैक की कमियां दूर हो जाएंगी।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए