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स्मार्ट सिटीः सौ शहरों की रैंकिंग में अब 65वें नंबर पर बरेली

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पिछली रैंकिंग में था 89वां नंबर, कुछ सुधार हुआ मगर अब भी हालत काफी दयनीय
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स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर केंद्र सरकार ने जारी की रैंकिग

बरेली। स्मार्ट सिटी शहरों की रैंकिंग में पिछली बार दयनीय स्थिति तक पहुंचे बरेली की स्थिति अब कुछ सुधरी है। रविवार को जारी रैंकिंग में शहर 89 से 65वें स्थान पर पहुंच गया है। स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं की प्रगति के आधार पर केंद्र सरकार ने रैंकिंग जारी की है।
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स्मार्ट सिटी योजना में 2018 में चुने जाने के बाद शहर में काम शुरू होने में ही करीब दो साल लग गए। जनवरी तक शहर 89वें स्थान पर था। कुछ परियोजनाओं के टेंडर और वर्क ऑर्डर के साथ काम शुरू होने पर रविवार को 65वें स्थान पर आ गया। बता दें कि स्मार्ट सिटी योजना में शहर में कामकाज और अवस्थापना की सुविधाओं को स्मार्ट बनाने के लिए 1902 करोड़ की परियोजनाएं बनी थीं। हाल ही में 300 करोड़ की परियोजनाओं पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मुहर लगने का फायदा रैंकिंग में सुधार के रूप में सामने आया है। स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ अभिषेक आनंद ने बताया कि लॉकडाउन में स्मार्ट सिटी परियोजनाएं रुक गई थीं। अब उन्हें शुरू किया गया है। उन्होंने दिसंबर तक रैंकिंग और बेहतर होने की उम्मीद जताई है। सीईओ ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर 100 स्मार्ट सिटी शहरों की रैंकिंग में पिछले 15 दिनों में बरेली ने 24 स्थानों की छलांग लगाई है।

ऐसे होती है स्मार्ट शहरों की रैंकिंग

देश के 100 शहरों की स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं के क्रियान्वयन के आधार पर रैंकिंग की जाती है। इसमें टेंडर, वर्क ऑर्डर और पूरे हुए विकास कार्यों के लिए अलग-अलग अंक दिए जाते हैं। फंड के उपयोग के लिए भी अंक दिया जाता है। इन सारे अंकों को मिलाकर जिस शहर को जितने अंक मिलते हैं उसके आधार पर रैंकिंग निकाली जाती है।

यह है रैंकिंग का उद्देश्य

रैकिंग का उद्देश्य शहरों में सामाजिक, आर्थिक, संस्थागत और भौतिक मानकों को ध्यान में रखते हुए आपस में प्रतिस्पर्धा खड़ी करना होता है ताकि शहर अपने-अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार लाते हुए लोगों को बेहतर सुविधा दे पाए। रैंकिंग करते समय इन शहरों में सेहत सुविधाएं, शिक्षण संस्थान, वेस्ट मैनेजमेंट, प्रदूषण, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और कानून और व्यवस्था को ध्यान में रखा जाता है।
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