भाई बोले- प्लॉट बेचकर दिए दस लाख रुपये
आदेश के भाई अंशुल तिवारी ने एसओजी टीम पर गंभीर आरोप लगाए। बताया कि एसओजी ने आदेश को 29 जून को उनके घर से उठाया था और दो जुलाई को जेल भेज दिया। एसओजी ने उनसे दस लाख रुपये की मांग की। हमने प्लॉट बेचकर रुपये दिए। तय हुआ था कि एसओजी उसे छोड़ देगी। एसओजी ने कुछ और लोगों को भी इसी तरह रुपये लेकर छोड़ा था।
बाद में एसओजी के सदस्य आनाकानी करने लगे। फिर कहा कि पिटाई नहीं लगेगी और हल्की धारा में कम स्मैक दिखाकर जेल भेजा जाएगा। ये वादा भी टूट गया। इज्जतनगर पुलिस ने भारी भरकम स्मैक साथ में दिखाई और पिटाई भी की। इससे आदेश की हालत बिगड़ गई। उसे जेल भेजा गया तो जेल प्रशासन ने भी इलाज पर ध्यान नहीं दिया। इसकी वजह से भाई की मौत हो गई। मृतक की मां का कहना है कि पुलिस ने बेटे को पीटा। दो महीने बाद उसकी शादी थी।
पुलिस रिकार्ड में दो प्रदेशों में तस्करी करता था आदेश
बरेली पुलिस ने आदेश की मौत के बाद उत्तराखंड पुलिस से संपर्क साधकर उसका आपराधिक रिकार्ड निकाला। इससे पता लगा कि देहरादून में भी आदेश के खिलाफ वर्ष 2018 और 2019 में स्मैक तस्करी की रिपोर्ट दर्ज है। वह अक्सर बाहर रहता था और कम समय में उसके काफी धन कमा लिया था। हाल ही में घर लौटकर वह बरेली में भी तस्करी करने लगा था।
सीओ प्रथम आशुतोष शिवम ने बताया कि स्मैक तस्करी कर समाज में नशे की सामग्री बेचने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इनमें आदेश तिवारी भी शामिल था। न्यायिक हिरासत में भेजने से पहले जिला अस्पताल में उसका मेडिकल परीक्षण हुआ, इसमें कोई चोट का निशान नहीं है।
जेल में परिजनों से मुलाकात के दौरान तबीयत खराब होने पर मौत हुई है। डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा जिसकी वीडियोग्राफी भी होगी। संज्ञान में आया है कि आदेश हार्ट पेशेंट था एवं उसे स्टंट पड़े हुए थे। अगर परिवार कोई लिखित शिकायत करेगा तो उसकी उच्च स्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।