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Bareilly News: हुनरमंद महिलाएं बेटियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

Sun, 09 Aug 2026 01:23 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। शहर की हुनरमंद महिलाएं दूसरी महिलाओं व बेटियों को भी शिक्षण और प्रशिक्षण के जरिये आत्मनिर्भर बना रही हैं। कोई जलकुंभी से हस्तशिल्प के उत्पाद बनाना सिखा रही हैं तो कोई जरी-जरदोजी, सिलाई और ब्यूटीशियन का निशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं। जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारने वाली महिलाएं भी बदलाव की मिसाल बन रही हैं।
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पुराने कपड़ों से बना रहीं रोजगार की पोटली
आलमगिरीगंज की रुचि अग्रवाल के मन में बचपन से ही लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने की चाह थी। शादी के कई वर्ष बाद उन्होंने इसे पूरा किया। आसपास की लड़कियों को पुराने कपड़ों से साड़ी कवर, मेकअप बॉक्स और पोटली बैग बनाने का प्रशिक्षण देने लगीं। धीरे-धीरे लड़कियां हुनरमंद हुईं और मेले, प्रदर्शनियों व थोक दुकानों पर उत्पाद बेचकर कमाई करने लगीं। अब तक 250 बेटियां उनसे प्रशिक्षण ले चुकी हैं। इनमें ज्यादातर गरीब परिवारों की बेटियां हैं जो पढ़ाई के साथ कमाई भी कर रही हैं। रुचि प्लास्टिक का विकल्प तैयार करने के लिए इको-फ्रेंडली उत्पाद बनाना भी निशुल्क सिखाती हैं।

सिर्फ सौ रुपये में प्रोफेशनल प्रशिक्षण
राजेंद्र नगर निवासी अमिता अग्रवाल जरूरतमंद बेटियों और महिलाओं को ब्यूटीशियन, सिलाई और हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण महज 100 रुपये में दे रही हैं। अब तक 500 से अधिक लड़कियां उनसे प्रशिक्षण ले चुकी हैं। हजारों रुपये में होने वाले प्रोफेशनल ब्यूटी कोर्स को वह नाममात्र शुल्क में करा रही हैं, ताकि बच्चियां इसे गंभीरता से सीखें। प्रशिक्षण के लिए पांच महिला ट्रेनर हैं जो निशुल्क सेवाएं दे रही हैं। अमिता के अनुसार शुरुआत में काफी दिक्कतें आईं, लेकिन आज कई लड़कियों को जब अपना बुटीक, सैलून और पार्लर खोले देखती हूं तो खुशी होती है।
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मां से मिली सीख, बच्चों को दे रहीं शिक्षा
मां के साथ स्कूल आते-जाते जरूरतमंद बच्चों की स्थिति देखी तो बड़ा बाजार की अनमता जावेद ने उनके लिए कुछ करने का संकल्प लिया। वर्ष 2016 से वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क पढ़ा रही हैं। अब तक 250 से अधिक बच्चों को शिक्षा दे चुकी हैं। यूपीएससी की तैयारी कर रहीं अनमता का कहना है कि परिवार ने काफी विरोध किया, लेकिन बच्चों की ये सेवा जारी रहेगी। एनएसएस से जुड़कर वह पौधरोपण, स्वच्छता, रक्तदान और सड़क सुरक्षा जैसे अभियानों में भी सक्रिय रहीं। कोविड के दौरान जरूरतमंद परिवारों तक भोजन पहुंचाने में भी योगदान दिया।



जलकुंभी को तराशने का सिखा रहीं हुनर
संजयनगर निवासी वंदना राठौर अब तक 400 से अधिक महिलाओं को हुनरमंद बना चुकी हैं। तीन साल पहले उन्होंने जरूरतमंद महिलाओं को जलकुंभी से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण देना शुरु किया। शहरी युवतियों को जरी-जरदोजी के काम का प्रशिक्षण दिया। आज 35 महिलाएं उनसे प्रशिक्षण ले रही हैं। महिलाएं तालाबों से जलकुंभी निकालकर उत्पाद तैयार करती हैं और वंदना को ही बेच देती हैं। इससे महिलाओं को अच्छा मुनाफा मिलता है। वंदना के अनुसार, प्रशिक्षण लेने वालों में बेसहारा, मजदूरी पेशा और तलाकशुदा महिलाएं शामिल हैं।
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